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फ्धर्म निर्णय मण्डल इस अवसर पर लाभ उठाता है, जब हिंदू संहिता प्रस्तुत की गई है। सदन के वर्तमान सत्र में अपनी प्रशंसा को व्यक्त करने, जो सामान्य उदारीकरण के प्रभाव को लाया गया है वर्तमान संहिता की संरचना में रखने के लिए मंडल इस प्रभाव को आगे दी गई बातों को हटाने के पक्ष में स्पष्ट देखता हैµ
(क) संयुक्त पैतृक सम्पत्ति और स्वअर्जित सम्पत्ति के संबंध में अंतर_
(ख) अलग-अलग व्यवहार बेटों और बेटियों के साथ_
(ग) महिलाओं की सम्पत्ति की व्याख्या में तकनीकी कठिनाई_
(घ) उत्तराधिकार के मिताक्षर तथा दायभाग नियमों में अंतर।
मण्डल का विश्वास है कि ऊपर बताए गए सुधार न्यायालयों में मुकद्दमेबाजी को अधिकांशतया कम करेंगे तथा उस हिंदू संहिता को समस्त भारत के हिंदुओं पर लागू किए जाने से एकता की भावना को प्रोत्साहन मिलेगा। मण्डल इस बात पर ध्यान देता है कि इतिहास में इस दिशा में जो कभी किया गया, यह प्रथम प्रयास है।
यही कारण है कि कई छोटे-छोटे मतभेदों के बावजूद मण्डल सहृदयता से वर्तमान विधिकरण को समर्थन करता है जिस स्थिति में वह है।
बाबू रामनारायण सिंहः वे किन लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वे पढ़े-लिखे रुढि़वादी लोग हैं।
माननीय श्री एन.वी. गाडगिलः परन्तु प्रबुद्ध रुढि़वादी। अब मैं संयुक्त हिंदू परिवार के प्रश्न पर विचार करता हूँ। यह सदन निसंदेह मुझसे सहमत होगा कि समय के बदलने के साथ प्रगतिशील समाज को भी बदलना चाहिए और ऐसी उपयुक्त संस्थाएं विकसित करनी चाहिए जिनका संबंध सम्पत्ति और कानून से हो।
4.00 बजे सायं
अब समय आ गया है कि संयुक्त पारिवारिक पद्धति के गुणों का निष्पक्ष रूप से मूल्यांकन किया जाना चाहिए, दोनों पारिवारिक सूख प्राप्त करने की दृष्टि से और साथ ही सम्पत्ति की दृष्टि से। आज भी यदि कोई मुझे संयुक्त हिंदू परिवार के लाभों के बारे में विश्वसनीय दलीलें देगा, तो मैं उसे सुनने के लिए तैयार हूँ क्योंकि मैं हठधर्मी नहीं हूँ। मैं महसूस करता हूँ कि सत्य ही वास्तविकता है, अपने खुद के विचारों के लिए प्रतिष्ठा है।
अब पहली बार पर विचार करते हुए, तो क्या संयुक्त परिवार की पद्धति ने परिवार के वैयक्तिक सदस्यों को खुशी प्रदान की है? मैं यह नहीं पूछ रहा हूँ कि पुत्र-वधुएं