(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 149

134 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

क्या महसूस करती हैं जब उन्हें बड़े परिवार में रहना पड़ता है। मैंने जो कुछ देखा और सुना है, वह निश्चय ही यह प्रदर्शित करता है कि जहां तक प्रसन्नता और समरसता का संबंध है, यह संस्था अब किसी भी उपयोग अथवा महत्व की नहीं रही है। वस्तुतः इसमें कुछ भी नया नहीं बचा है। यदि 32 करोड़ हिंदुओं में से लगभग 5 करोड़ हिंदू पहले ही से दायभाग से अधिशासित हैं और यदि यह ठीक से काम करती हैं। कम से कम यह कोई नहीं कह सकता कि यह पद्धति नितांत खराब है और हमें उस पर सोचना चाहिए। ( एक माननीय सदस्यः यह नितांत नवीन है)।

यह नवीन पद्धति है, इसमें कोई संदेह नहीं है। परन्तु वह कौन-सा समाज है, जिसके बारे में हम भविष्य के लिए सोच रहे हैं? क्या वह पितृ सतात्मक प्रकार का है? आप जो समाज पुनर्निर्मित करना चाहते हैं, वह वास्तव में किस प्रकार का समाज है? जैसा कि मैं समझता हूँ कि यह वह समाज है जिसमें प्रतिष्ठा की समानता तथा अवसर की समानता होगी, क्योंकि ये दोनों बातें हैं जिन्हें हमने संविधान के प्रारुप की प्रस्तावना में सम्मिलित किया है। मेरे विचार से उस प्रस्तावना के संयुक्त परिवारिक संपत्ति की पद्धति अनुकूल नहीं है।

मुझे लगता है कि वास्तविक कठिनाई यह होगीµअलग-अलग सदस्यों के भाषण सुनने के बाद, कि बेटियों को क्या दिया जाना है। परन्तु संपत्ति की संस्था होने के नाते संयुक्त पारिवारिक पद्धति समाप्त होनी चाहिए, क्योंकि लोग मुझसे पूछना चाहेंगे, क्या कुछ अच्छा किया है अथवा क्या इससे कुछ अच्छा नहीं किया है? मैं तत्काल इस बात से समहूत हूँ कि इससे अच्छा किया है, परन्तु जहाँ तक सम्पत्ति के पक्ष का संबंध है, जहां तक सामाजिक साख का संबंध है, अन्य विकल्प भी पहले से ही विद्यमान हैं, जैसे सहकारी संस्थाएँ और संयुक्त स्टॉक कम्पनियां। इसलिए जहां तक सामाजिक साख का सबंध है इस संस्था की आवश्यकता नहीं है। विकल्प अस्तित्व में आ गए हैं और अनुभव से हम पाते हैं कि व्यवसायों की क्रियाविधि के तहत अन्य कई वे अच्छे परिणाम देते हैं। इसलिए हम किसी भी वस्तु को तब तक नष्ट नहीं कर रहे हैं जब तक इसके स्थान पर कुछ अन्य उपयोगी वस्तु प्राप्त न कर लें। हम पूरे समाज को ऐसी रिक्तता में नहीं छोड़ रहे हैं जैसा कि यह समाज पहले था। जो कोई भी अपनी उपयोगिता खो बैठा है, उसे ही दिवालिया किया जा रहा है ताकि नया भारत तेज गति से आगे बढ़े और अधिक प्रगति प्राप्त करे।

अब वास्तविक कठिनाई, जैसा कि मैंने कहा था इस बारे में है कि बेटी को सम्पत्ति का कुछ भाग दिया जा रहा है। चाहे वह भाग आधा होना चाहिए अथवा उससे भी कुछ कम होना चाहिए। जिसके विवरण के बारे में बाद में विचार-विमर्श किया जा सकता है। परन्तु एक बात निश्चित है और वह बात यह है कि बेटी को कुछ भाग प्राप्त अवश्य होना चाहिए। स्वतंत्र भारत में यदि आप यही करने जा रहे हैंµ