(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 151

136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ही गतिशील होने से वह यदा-कदा आगे बढ़ जाता है। यह ऐसा क्षितिज है, जो उसके लिए घट जाता है, जो उसके पास जाता है। आधुनिक समाज अपनी प्रकृति के अनुसार शीघ्रातिशीघ्र प्रगति करता है, इसलिए हमें लोकमत तथा देश के कानून का समायोजन करना है। कुछ अन्य उपाय भी हैं, जिनके द्वारा यह कार्य सम्पन्न किया जा सकता है, जैसे कानूनी परिकल्पना अथवा साम्यता, परन्तु सर्वोत्तम और ईमानदार उपाय यही है कि इसे विधान द्वारा सम्पन्न किया जाए। इस संबंध में मेरा विचार है कि यह एक ऐसा ही प्रयास है, यद्यपि मैं इस बात से सहमत हूँ कि यह क्रांतिकारी है, पर यह एक नियोजित क्रांति है, इसलिए इसे सफलता प्राप्त करने जा रही है।

ऽश्री नजीरुद्दीन अहमदः मेरे पास बहुत कम समय है। ( डॉ. वी.आर. अम्बेडकरः क्यों? आपके पास अपना समय है)। मेरा मतलब यह है कि तुलनात्मक रूप से ऐसे अपनी बात रखने से विषय के लिए मुझे कम समय मिला है, जिस पर मुझे कहना है और मैं यह आशा करता हूँ कि सदन भी इस विषय पर उतना विचार करेगा और ध्यान देगा, जितना कि मैंने इसके लिए दिया है। ( एक माननीय सदस्यः आपको इससे क्या करना है?) प्रारम्भ में मुझसे पूछा गया है कि मुझे इससे क्या करना है। मैं कहता हूँ कि मुझे इसके बारे में सब कुछ करना है। इस देश में दो विशाल परिवर्तन हुए हैं। एक हमने अपने साम्प्रदायिक चरित्र को निकाल बाहर करने का निर्णय किया है और दूसरा हमने

खुद को संयुक्त निर्वाचन के लिए तैयार किया है। क्या कोई भी माननीय सदस्य किसी मुसलमान के इस अधिकार से इन्कार कर सकता है कि वह भी उसी प्रकार सोचे जैसे कि अधिकांश हिंदू सोचते हैं? आखिरकार हमें हिंदुओं के साथ रहना है। पश्चिम बंगाल में उनकी जनसंख्या 80 प्रतिशत है और हमें उनके साथ रहना और सोचना है। आप मेरे साथ पश्चिम बंगाल को चलिए। पंडित मैत्रेय ने बंगाल के विरोध को अति सरल भाव से प्रस्तुत किया है, जब उन्होंने कहा है कि वहां इस विधेयक का अत्यधिक विरोध है।

श्रीमती रेणुका रेः वहां समान रूप से और गंभीरतापूर्वक समर्थन भी किया गया है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मेरे साथ पश्चिम बंगाल चलिए। मैं कट्टठ्ठरवादी लोगों की ओर से नहीं बोल रहा हूँ। जहां तक इस विधान के उस पक्ष का संबंध है मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना है। मुझे इस सदन के समक्ष कुछ ऐसे गंभीर प्रश्न उठाने हैं, जो अभी तक नहीं उठाए गए हैं। बंगाल में वह आपत्ति इतनी गंभीर है कि यदि कोई लोकमत जानने के लिए वहां की यात्रा पर जाता है (व्यवधान)। मेरा मतलब है बुद्धिशील और उन्नत लोकमतµयदि कोई वहां जाता हैµयदि कोई यात्रा करता है एक नगर से दूसरे नगर, पश्चिमी बंगाल की यात्रा करता है तो उसे सर्वाधिक बुद्धिमान व्यक्तियों से इस विधेयक के विरोध का सामना करना पड़ेगा। सबसे प्रबुद्ध व्यक्तियों से (एक माननीय

ऽसीए. (विधा.) डी., खंड 2, भाग II, 28 फरवरी, 1949, पृष्ठ 1020-30