(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 152

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सदस्यः जो माननीय सदस्य ने स्वयं नहीं किया है।) मेरा विश्वास है कि यह हस्तक्षेप इस विषय के संपूर्ण विचार पर आधारित नहीं है। अतः मैं यह निवेदन करता हूँ कि इस बात पर सहमति होगी कि बार के सदस्य अधिक दकियानूसी नहीं हैंख्...,

श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः उनमें से अधिकांश व्यक्ति रुढि़वादी और दकियानूसी ही हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः शायद वे रुढि़वादी लोगों में से नहीं हैं।

श्रीमती रेणुका रेः श्री अतुल गुप्ता के मत के बारे में आप क्या कहेंगे, जिन्हें सबसे प्रमुख अधिवक्ताओं में से एक माना गया है और कांग्रेस द्वारा उन्हें विभाजन समिति के लिए चुना गया है।

श्री कृष्णचंद्र शर्माः क्या एक अधिवक्ता की बात को नज़ीर माना जा सकता है?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः इन हस्तक्षेपों के बावजूद मैं पुनः निवेदन करता हूँ कि वे रुढि़वादी नहीं हैं। आप किसी भी पुस्तकालय में चले जाइए तो वहां आपको यह पता लगेगा कि इस विधेयक का आमूल-चूल विरोध किया गया हैख्...,

श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः क्योंकि उनके व्यवसाय खत्म हो जाएंगे।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ कि आप इस विधेयक से बार के व्यवसायों को समाप्त कर रहे हैं। आप जटिलताएं पैदा कर रहे हैं, जिनके बारे में आपको भी ज्ञात नहीं है। दूसरी ओर, मैं यह निवेदन करता हूँ कि अलग हैसियत से एक अधिवक्ता के व्यवसायिक हैसियत के इस विवादास्पद विधिकरण को प्रस्तुत करने के लिए इस सदन को धन्यवाद ही देंगे। कलकत्ता उच्च न्यायालय के चार बड़े हिंदू न्यायाधीश, इनमें से एक, जो अब फेडेरल कोर्ट की शोभा बढ़ा रहे हैं, श्री बी.के. मुखर्जी ने कहा हैµफ्यह कानून पहले से ही सुस्थापित है और यह कानून सर्वविदित है। यह कानून यहां कुछ अलग हो सकता है परन्तु वह विभिन्न कारणों से है, जिनके बारे में मुझे व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है। पर यह कानून सर्वविदित है।य्

श्री ए. करुणाकर मैननः यदि कानून इतना अधिक स्थापित है तो हर इसकी सप्ताह की रिपोर्टें क्यों होती हैं?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः इसका कारण यह है कि मैं यह महसूस करता हूँ कि मेरे माननीय मित्र उन बारीकियों को महसूस नहीं करते, जो इस कानून के अंतर्गत छिपी हैं। वास्तव में पूर्व निर्णय आवश्यक हैं। आप विधान पहले ही किसी संभावित मामले पर विचार नहीं कर सकते, इसलिए विधिकरण की आशा में आवश्यक है। वे कठिनाइयों को उजागर करते हैं तथा भविष्य में मामलों के निर्णय में सहायक होते हैं। जिस क्षण