(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 159

144 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि इस समय आम लोग अनपढ़ हैं, यहां या प्रांतीय राजधानियों में हम जो भी निश्चय करें इस प्रकार के विधानों को गांवों में लागू करना कठिन है। हमें पहले ही ‘अधिक अनाज उपजाओं’ अभियान का अनुभव हो चुका है। मेरे प्रांत में सरकार कई रियायतें और सुविधायें दे रही हैं, लेकिन ग्रामीणों को इसकी कोई जानकारी नहीं है। तब इस कानून का क्या परिणाम होगा? गांवों के गुंडे इस मामले में ग्रामीणों के अज्ञान का अनुचित लाभ उठा सकेंगे।

एक दृष्टि से शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा गांवों में स्थिति अधिक खराब होगी। वर्तमान संवैधानिक स्थिति के अनुसार इस कानून से कृषि भूमि प्रभावित नहीं होगी। इसका अर्थ यह होगा कि मृत कृषक की सम्पत्ति के दो प्रकार के वारिस होंगे। उसकी कृषि भूमि एक प्रकार के वारिसों को जायेगी और शेष सम्पत्ति दूसरे प्रकार के वारिसों को जायेगी। इससे दुविधा और बढ़ जायेगी। हम यह विधान एकरूपता लाने के लिए बना रहे हैं, लेकिन एकरूपता और सरलता का स्थान जटिलता और भ्रांति ले लेगी। इस दुविधा से बचने के लिए बेहतर यह होगा कि हम नया संविधान लागू होने तक प्रतीक्षा करें। हमें कोई जल्दीबाजी नहीं करनी चाहिये। मैं व्यक्तिगत रूप से अनुभव करता हूँ कि यह कानून पेश तो कर दिया जाये, लेकिन इसे लागू एक या दो आम चुनाव होने के बाद किया जाये। उन आम चुनावों से ग्रामीणों की राजनैतिक चेतना तेज़ी से जागृत होगी और वे विधानमंडल की कार्य-प्रणाली के बारे में अच्छी तरह जान पायेंगे। उस स्थिति में ग्रामीण, विधान को बेहतर ढंग से प्रभावित कर सकेंगे जिसका उनके हितों पर काफी प्रभाव पड़ता है। अतः मेरा अनुरोध है कि जब तक लोगों में राजनैतिक चेतना नहीं आती, तब तक हमें उन पर यह विधान नहीं थोपना चाहिए।

अन्त में मैं अपने उत्साही मित्रों से, जो इस विधान के प्रबल समर्थक हैं, अनुरोध करता हूँ कि वे इतने उत्तेजित न हों कि वे अपने उद्देश्य को पूरा करने में ही असफल हो जायें।

ऽश्री ए. करूणाकर मेनन (मद्रासः सामान्य)ः महोदय, मैं इस विधेयक का हृदय से समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूँ। इससे हिंदू समाज को मजबूत करने में काफी सहायता मिलेगी। हिंदू कानून अपने वर्तमान रूप में कई कानूनी पद्धतियों का मिश्रण है। हमने अपने संविधान में घोषणा की है कि हम एक ऐसी समान सिविल संहिता बनायेंगे जो समूचे भारत पर लागू होगी। ऐसी एक समान संहिता विकसित करने में इस हिंदू संहिता से काफी सहायता मिलेगी। मैं चाहता हूँ कि मुसलमान मित्र भी मुस्लिम कानून को संहिताबद्ध करने के लिए विधेयक लायें। ईसाइयों का पहले ही एक संहिताबद्ध कानून है। इन तीन संहिताबद्ध कानूनों के अस्तित्व में आने के बाद इन तीन संहिताओं के एक से प्रावधान चुनना और संविधान के अन्तर्गत निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति करना सरल हो जायेगा। इस विधेयक का इसलिए भी स्वागत है कि इस से महिलाओं को और अधिक अधिकार मिलेंगे।

ऽसंविधान सभा (विधायी) डी., खंड 6, भाग II, 12 दिसम्बर, 1949, पृष्ठ 504-506