146 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
निषिद्ध है। इस देश के हमारे क्षेत्र के लोग हमारे अधिकार पर इस प्रकार के अतिक्रमण को पसन्द नहीं करेंगे।
न्यायिक पृथक्करण अथवा दाम्पत्य अधिकारों की पुनःस्थापना के बारे में भी हमारे कानून में कोई प्रावधान नहीं है। या तो विवाह बना रहता है या तलाक के माध्यम से इससे छुटकारा पा लिया जाता है। बीच का कोई रास्ता नहीं है। तलाक का, प्रावधान बड़ा सरल है। कोई भी दुःखी पक्ष निकटतम न्यायालय में जाता है और अपनी याचिका पर बारह आना कि स्टाम्प लगाकर यह प्रार्थना करता है कि फ्फलां फलां कारणों से हम एक साथ नहीं रह सकते और इसलिए तलाक दिया जाये।य् वह याचिका छः महीने तक लम्बित रखी जाती है। संभवतया कानून निर्माताओं की ऐसा प्रावधान करने के पीछे यह मंशा थी कि क्या इस छः महीने की अवधि के बीच समझौता हो सकता है। छः महीने की इस अवधि के बाद कुछ नहीं होता तो तलाक स्वतः हो जाता है। यह प्रावधान सरल है और विधेयक के खंड 51 से यह स्पष्ट है कि विधेयक के निर्माताओं का ध्यान इस ओर गया है, क्योंकि तलाक का यह प्रावधान विधेयक में भी बनाये रखा गया है। किन्तु मुझे यह समझ में नहीं आता कि इस प्रावधान का लाभ अन्य सभी हिन्दुओं को क्यों नहीं लेने दिया जाता।
विवाह के विघटन के प्रावधान से इस सभा के कुछ सदस्य नाराज़ हो गये हैं। यद्यपि तलाक का प्रावधान मालाबर में 1932 से है, पर मैं समझता हूँ कि वास्तव में वहाँ एक दर्जन तलाक भी नहीं हुए हैं। इससे एक विद्वान लेखक वर्टरैन्ड रसेल का यह कथन सही सिद्ध होता है कि फ्तलाक के कानून अत्यन्त सरल होने से तलाक कदाचित अधिकतम नहीं होते। जहां कहीं तलाक होता है, वहाँ भी जारकर्म कम और नैतिकता अधिक होती है।य्
जहाँ तक गोद लेने का सम्बन्ध है, देश के हमारे क्षेत्र में जो प्रथा व्याप्त है, उसकी तुलना में इस विधेयक के प्रावधान असंतोषजनक हैं।
इस विधेयक के अनुसार दत्तक ग्रहण एक धार्मिक मामला है किन्तु मरूमाकट्टायम लोगों में यह एक शुद्ध धर्मनिर्पेक्ष मामला है। हिंदू संहिता के अन्तर्गत केवल एक पुरुष अथवा उसकी विधवा किसी व्यक्ति को गोद ले सकते हैं, किन्तु हमारे कानून के अनुसार कोई भी व्यक्ति, पुरुष अथवा महिला, किसी व्यक्ति को गोद ले सकते हैं। जबकि हिंदू कानून के अन्तर्गत किसी पुरुष को ही गोद लिया जा सकता है, हमारे कानून के अन्तर्गत पुरुषों अथवा महिलाओं को गोद लिया जा सकता है। जबकि हिंदू कानून के अंतर्गत केवल एक व्यक्ति को गोद लिया जा सकता है, हम अपनी सम्पत्ति के वारिस के रूप में अथवा परिवार समाप्त होने के समय एक व्यक्ति, दो व्यक्तियों अथवा एक पूरे परिवार को गोद ले सकते हैं। अतः इस मामले में हमारे कानून और मरूमाकट्टायम कानून में काफी अन्तर हैं। विधेयक तैयार करते समय इन चीज़ों का ध्यान न रखने का मेरे अनुसार कारण यह है कि पूरा परिवेश पूर्णतया पितृ सत्तात्मक न कि मातृ सत्तात्मक