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ऽमाननीय अध्यक्षः केवल दस मिनट रह गये हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या कोई सदस्य दस मिनट में अपना भाषण समाप्त करेगा।
कुछ माननीय सदस्यः खड़े हो गए।
श्री सीताराम एस. जाजू (मध्य प्रदेश)ः महोदय, मैं दस मिनट में अपना भाषण समाप्त कर दूँगा।
आरम्भ में मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैं प्रस्तुत हिंदू संहिता विधेयक का हार्दिक स्वागत करता हूँ। मुझे यहां खड़ा होने में हिचकिचाहट हो रही है, क्योंकि मैं महसूस करता हूं कि पुरानी पीढ़ी के लगभग सभी सदस्यों ने हिंदू संहिता विधेयक का विरोध किया। मैं उनके दिलों को चुनौती नहीं देता, लेकिन जहां तक हिंदू संहिता विधेयक का सम्बन्ध है, उनके दिल बूढ़े या बासी प्रतीत होते हैं।
श्री एम. तिरुमला रावः क्या मैं यह कह सकता हूँ कि पुरानी पीढ़ी की महिलायें भी आपका समर्थन कर रही हैं?
श्री सीताराम एस. जाजूः हाँ, क्योंकि वे प्रगतिशील है, क्योंकि वे प्रगति करना चाहती हैं। मेरे मित्र श्री कृष्ण चन्द्र शर्मा के शब्दों में वे अधिक प्रगतिशील हैं और आगे बढ़ रही हैं, जबकि पुरुष पीछे की ओर जा रहे है। बहरहाल, मेरा सम्बन्ध वर्तमान रूप में हिंदू संहिता विधेयक से है।
महोदया, मैं नहीं बोलता लेकिन इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए मैं बोल रहा हूँ कि मैं यहाँ युवा पीढ़ी के विचार रख सकता हूँ और मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि देश की युवा पीढ़ी हिंदू संहिता के पक्ष में है। इस तथ्य को बहुत उछाला गया है कि इस विधेयक को भारतीय प्रांतों में लोकमत जानने के लिए परिचालित नहीं किया गया है। मैं यह कहना चाहता हूँ कि इस सभा में कई विधेयक पारित किये गये हैं, लेकिन उस समय किसी ने कोई उंगली नहीं उठाई और अब यह कहा गया कि उन विधेयकों को भारतीय प्रांतों में लोकमत जानने के लिए पारिचालित नहीं किया गया।
कुछ माननीय सदस्यः किन्तु यह इतना विवादास्पद विधेयक है।
श्री सीताराम एस. जाजूः कई विवादास्पद विधेयक आये हैं। सिरोही का प्रश्न अत्यन्त विवादास्पद था, लेकिन प्रांतों के लोगों से इस बारे में परामर्श नहीं किया गया।
श्री गोकुल भाई दौलत राम भट्ट (बम्बई प्रांत)ः महोदया, सिरोही के बारे में कोई विधेयक नहीं था।
ऽसंविधान सभा (विधायी) डी., खंड 6, भाग II, 12 दिसम्बर, 1949, पृष्ठ 506-508