(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 165

150 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय उपाध्यक्षः मैं माननीय सदस्यों से अनुरोध करती हूँ कि वक्ता को अवाध बोलने दें।

सरदार हुकुम सिंहः युवा पीढ़ी यदि भटक जाये तो क्या उसे ठीक मार्ग पर लाना, बड़े लोगों को कर्तव्य नहीं है?

श्री सीताराम एस. जाजूः युवा पीढ़ी को काबू में लाना और उनका मार्गदर्शन करना निश्चित रूप से उनका अधिकार है, किन्तु उन्हें प्रगति की ओर ले जाया जाना चाहिये न कि अधोगति की ओर।

एक माननीय सदस्यः हमारा 80 वर्ष तक का अनुभव है।

श्री सीताराम एस. जाजूः 80 वर्ष का अनुभव हो सकता है। किन्तु राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भी अनुभव है। ऐसी कई पुस्तकें हैं जिनमें उनके द्वारा समय-समय पर प्रकाशित लेख अन्तर्विष्ट किये गये हैं। जो हिंदू महिलाओं के उत्थान के बारे में थे। और जहां तक हिंदू संहिता का सम्बन्ध है, मैंने कई कट्टर विरोधियों को सुना है कि विरासत और बहनों तथा बेटियों के साथ बंटवारे सम्बन्धी प्रावधान को छोड़कर शेष पूरी संहिता पारित कर दी जाये, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। इसका विरोध मुख्य रूप से मारबाड़ी समुदाय, जिससे मैं सम्बन्धित हूँ, ने किया है। किन्तु मैं यह कहूँगा कि मारबाड़ी युवक हिंदू संहिता विधेयक के पक्ष में हैं। यदि हम कहते हैं कि पुराने लोग हैं और उनका अनुभव है, तो महात्मा गाँधी ने अपनी जीवनी में लिखा है कि हिंदू पत्नी को देखने से आंखों के सामने एक अत्यन्त दयनीय दृश्य आता है।

पण्डित मुकुट बिहारी लाल भार्गवः आप महात्मा गांधी के नाम का दुरुपयोग नहीं कर सकते।

श्री सीताराम एस. जाजूः शायद उनके नाम का जितना दुरुपयोग मैंने किया है, उससे अधिक आपने किया होगा। मैंने अभी अपना जीवन आरम्भ ही किया है और मुझे महात्मा के नाम की शपथ लेने का अभी कोई अवसर नहीं मिला है, जबकि बूढ़े लोगों ने, उन लोगों में से कुछ लोगों ने, जिनके बाल सफेद हैं, उनके नाम का सैकड़ों बार दुरुपयोग किया होगा।

महोदय, महात्मा गांधी लिखते हैं कि जहां तक हिंदू महिलाओं की स्थिति का सम्बन्ध है, यह बहुत ही दयनीय है। उनका कहना है कि यदि मालिक किसी नौकर से नाराज़ हो जाये तो नौकर अपने मालिक को छोड़ सकता है, लेकिन यदि कोई अपने बाप से नाराज हो जाये तो वह विभाजन की मांग नहीं कर सकता। यदि कोई आप अपने बेटे से नाराज़ हो जाये तो वह उसे घर से बाहर जाने के लिए कह सकता है, लेकिन जहां तक हिंदू पत्नियों का सम्बन्ध है, वे कहीं नहीं जा सकतीं। यदि महात्मा के हाथों में कस्तूरबा की यह स्थिति थी, तो हमारे जैसे साधारण मानवों के हाथों में महिलाओं की क्या स्थिति होगी?