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सरकार लाई थी। उस समय इसका विरोध करने की हमारे पास हिम्मत नहीं थी। जब कभी विदेशी सरकार द्वारा सामाजिक विधान लाये गयेख्...,
एक माननीय सदस्यः इतिहास की चिन्ता न करें।
श्री सीताराम एस. जाजूः मुझे निश्चित रूप से इतिहास की ओर देखना है, लेकिन अभी मुझे अपना भाषण देने दें। जब अंग्रेज सरकार कुछ विधान लाई जो हिंदू कानून को प्रभावित करते थे। तो उस समय हमने उन्हें स्वीकार कर लिया क्योंकि उनसे धनी लोगों-पूंजीपतियों पर कोई आर्थिक प्रभाव नहीं पड़ा। हमें यहां, तकलीफ हो रही है क्योंकि इससे हमारी जेब पर प्रभाव पड़ता है। हम इस सभा के पुरुष सदस्य काफी अधिक बहुमत में हैं। मैं नहीं चाहता कि बहुमत का प्रकोप इस सभा की अल्पमत महिला सदस्यों पर पड़े। देश की महिलायें समान्यतया अनपढ़ हैं। अतः हमें उनका शोषण नहीं करना चाहिये। एक बड़ा प्रचार किया जा रहा है कि इस विधेयक का उद्देश्य केवल एक चीज है और वह चीज तलाक है। सभी महिलाओं को यह बताया जा रहा है, प्रचारित किया जा रहा है, प्रभावित किया जा रहा है कि हिंदू संहिता पारित होने के बाद उनके पति उनका तलाक कर देंगे। हिंदू संहिता के प्रावधानों का इस प्रकार गलत अर्थ निकाला जा रहा है। मैं इन सभी लोगों को बताना चाहता हूं कि ऐसा एक भी आदमी नहीं होगा जो अनावश्यक रूप से तलाक देना चाहेगा। इसी प्रकार ऐसी एक भी महिला नहीं होगी जो अनावश्यक रूप से तलाक देना चाहेगी। न्यायालयों में काफी विवेक है ओर वे इस चीज को समझते हैं। न्यायापालिका निश्चित रूप से पूरे मामलों की जांच करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि न्याय हो। मुझे बस इतना की कहना है।
तत्पश्चात्, सभा की बैठक मंगलवार, 13 दिसम्बर, 1949 के पौने ग्यारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।