(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 171

156 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सांस्कारित विवाह के बारे में अन्य प्रकार की निर्योग्यताओं में अन्तर है। सांस्कारिक विवाह के बारे में यह प्रावधान किया गया है कि सपिंड सम्बन्ध, विधेयक के अनुसार निर्योग्यता का एक आधार होगा, जबकि सिविल विवाह के मामले में केवल निषिद्ध अवस्थाओं को ही विवाह के प्रभावशाली लागू न होने का एक आधार माना गया है। साथ ही विधेयक में रूपान्तरण किया गया यह परिवर्तन मेरी समझ में नहीं आया कि पक्षकार सांस्कारिक विवाह करते हैं तो भी पति या पत्नी इसे विधेयक के प्रावधानों के अन्तर्गत कानूनी विवाह में बदल सकते हैं। इस परिवर्तन से वास्तव में कोई प्रयोजन सिद्ध होता है या नहीं, यह एक ऐसा प्रश्न है जिस पर माननीय विधि मंत्री इस विधेयक को अन्ततः पारित करने से पूर्व विचार कर सकते हैं।

सन्तान के अधिकारों, विरासत के अधिकारों, पति-पत्नी के बीच के दायित्वों और प्रत्येक अन्य मामले में कोई भिन्नता नहीं हैं। अदालती विवाह और सांस्कारिक विवाह के मामलों में भी, पूरी तरह एक-सी स्थिति है। संभवतया, सांस्कारिक विवाह के कुछ प्रावधान कुछ पक्षकारों की भावनाओं को शान्त करने के लिए हैं। यदि वास्तव में यही उद्देश्य है, तो आप को बाद में सांस्कारिक विवाह को सरलता से अदालती विवाह में बदलने का प्रावधान नहीं करना चाहिये। या तो आप यह कीजिए या वह उदाहरण के तौर पर यदि आप सांस्कारिक विवाह और अदालती विवाह में भेद करना चाहते हैं तो कीजिये_ यह बात बिल्कुल स्पष्ट और निश्चित होनी चाहिये। सामान्य तौर पर सांस्कारिक विवाह के मामले में कुछ समारोह होते हैं। अदालती विवाह के मामले में कुछ औपचारिकताओं की आवश्यकता परमावश्यक नहीं होनी चाहिये। एक वकील के नाते मुझे इस विधायक के प्रावधानों के अन्तर्गत एक अदालती विवाह और सांस्कारिक विवाह में कोई वास्तविक भिन्नता दिखाई नही देती। मैं विधेयक के मूल उद्देश्यों में नहीं जाता, लेकिन मैं इसे केवल माननीय विधि मंत्री के विचारार्थ रखता हूँ।

जहां तक निषिद्ध रिश्तों में विवाह करने का सम्बन्ध है, आधुनिक प्रजनन-विज्ञान रिश्तेदारों में विवाह करने के हक में नहीं है। जो भी हो, काफी लोग इस सिद्धांत के पक्ष में हैं। उन परिस्थितियों में, जहां तक इस प्रावधान का सम्बन्ध है, क्या हम प्रगति कर रहे हैं या पीछे की ओर जा रहे हैं? कम से कम जहां तक इस भाग का सम्बन्ध है, मैं समझता हूँ कि हमारे पूर्वजों ने आधुनिक विचारों की प्रत्याशा में ही कुछ रिश्तों में विवाह करने पर पाबन्दी लगाई थी। मैं आप से पूछता हूँः प्रगति के नाम पर और उन्नत विचारों तथा सभ्यता के नाम पर अधोगामी कदम क्यों उठाया जाये? मैं निश्चित रूप से महसूस करता हूँ कि दूरवर्ती सपिंड के लोगों में या एक ही परिवार अथवा एक ही गोत्र के लोगों में विवाह करने पर कोई रोक नहीं होनी चाहिये। जहां तक नजदीकी रिश्तेदारी का सम्बन्ध है, नियमों में ढील देने की क्या आवश्यकता है? नजदीकी रिश्तेदारों में आपस में विवाह के औचित्य पर चर्चा के बारे में समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में मुझे बहुत कुछ पढ़ने को