165
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः वह अपने प्रस्ताव उत्कृष्ट तरीके से प्रकट कर रहे हैं।
श्री अल्लादी कृष्णा स्वामी अय्यरः मुझे इसमें संकोच नहीं है। मैंने अविवाहित बेटियों के बारे में प्रश्न पूछा है कि क्या कोई विशेष प्रावधान विवाह के बारे में किया जा सकता है अथवा कोई विशेष हिस्सा लड़कियों के विवाह के लिए अलग रखा जा सकता है। कानून में यह प्रावधान किया जा सकता है कि लड़कियां माताओं की वारिस होंगी और बेटे पिताओं के वारिस होंगे। जहां तब बेटियों का सम्बन्ध है, मैं चाहता हूँ और मेरी बड़ी आकांक्षा है कि लड़कियों के लिए, जो अविवाहित हैं, उदार और बाध्यकारी प्रावधान किया जाये। इसमें कोई कठिनाई नहीं है। मेरा यही प्रस्ताव है। अच्छा हो या बुरा, मेरा यही प्रस्ताव है।
एक माननीय सदस्यः मां से धन के बारे में आपका क्या कहना है?
श्री अल्लादी कृष्णा स्वामी अय्यरः इसके बारे में बोलने का कोई लाभ नहीं है। आप उन लोगों की जनगणना कीजिये जो इस देश में आयकर देते हैं? ऐसे लोगों की संख्या अधिक नहीं है। यह गरीब देश है। अतः यह कहने का कोई लाभ नहीं है कि मां के पास कोई सम्पत्ति नहीं होती। बहुत से लोग गरीब हैं। हो सकता है कि उनके पास कोई सम्पत्ति न हो। किन्तु वे सामाजिक दायित्वों्र से नहीं बच सकते। जिन के पास सम्पत्ति है, वे उसे बांट सकते हैं किन्तु उन लोगों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जिनके पास कोई सम्पत्ति नहीं है या बहुत कम सम्पत्ति है किन्तु साथ ही जो सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों के प्रति बड़े संवेदनशील है। अतः आप जो भी कदम उठाते हैं, आपको यह देखना होगा कि सामाजिक दायित्व न पिछड़ जाये। इस सम्बन्ध में मेरा यही अनुरोध है। संयुक्त परिवार सम्पत्ति की प्रथा के बारे में मेरा डॉ. अम्बेडकर से मतभेद है। मेरा उनसे प्रायः मतभेद नहीं होता और मैं प्रायः उनसे प्रभावित होता हूँ और कभी-कभी उन्हें प्रभावित करता भी हूँ। अतः मुझे कोई सन्देह नहीं है कि मैंने अपने भाषण मे जो आलोचना की है- उसकी ओर वे ध्यान देंगे। वह अडि़यल दिखाई दे सकते हैं किन्तु ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जो मरे मित्र डॉ. अम्बेडकर से अधिक विवकशील हो। मैं उन्हें भली-भाँति जानता हूँ और वह मेरे लिए एक महान सम्पदा हैं। मेरे कहने का अर्थ यह है कि इन तीन वर्षों में मेरा उनसे घनिष्ठ सम्बन्ध रहा है।
अस्तु, संयुक्त परिवार प्रथा और बेटों तथा बेटियों के समान उत्तराधिकारों के बारे में मेरा यही दृष्टिकोण है।
अगला पहलू स्त्रीधन सम्पत्ति के बारे में है और इसमें जहां तक परकीयकरण के अधिकार पर सभी प्रतिबंध हटाने के संबंध में मैं सभा के साथ हूँ, सभा के अन्य सदस्यों के साथ हूँ। क्योंंक इसने अनावश्यक मुकदमेबाजी को ही बढ़ावा दिया है। विरोधियों ने इस घोषणा के लिए मुकदमे दायर किये हैं कि विधवा द्वारा परकीयकरण अवैध है,