168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री अल्लादी कृष्णास्वामी अय्ययः महोदय, मैं नहीं जानता कि मैं अपनी बात स्पष्ट कर सका। मैंने यह कहा था कि यदि हमारी तख्ती बिल्कुल साफ होती तो हम कुछ अन्यथा करते किन्तु इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि यह सभा पहले ही कदम उठा चुकी है और विधान बना चुकी है, विवाह से सम्बन्धित खंड पर कोई गंभीर आपत्ति नहीं हो सकती सिवाय एक-दो मामलों के, जिनका मैंने अपने भाषण में उल्लेख कर दिया है।
डॉ. पी.के. सेनः मेरे विचार से सांस्कारिक विवाद के सिवाय।
जैसा कि मैं कह रहा था, हमें यह देखना है कि हर दृष्टि से विवाह कानून पूरी तरह निश्चित और स्पष्ट हो और इसमें कोई अस्पष्टता नहीं होनी चाहिये। और यही कारण है कि मैं मानता हूँ कि विधेयक में यह प्रावधान है कि विवाह सांस्कारिक पद्धति से हुआ हो तो भी इसके सम्बन्ध में आपत्तियाँ उठाई जा सकती हैं। यह कहा जा सकता है कि कुछ अनियमितता हुईं, कुछ भूल-चूक हो गई, या कोई विशेष औपचारिकता पूरी नहीं की गई। उदाहरण के लिए सप्तपदी को ही लीजिये। सभी जानते हैं कि सप्तपदी एक आवश्यक औपचारिकता है। जब तक सात कदम पूरे नहीं किये जाते, तब तक विवाह वैध नहीं माना जा सकता। वास्तव में विवाह के मामले में किसी भी तरह की अनियमितता को आपत्ति माना जा सकता है। यही कारण है कि विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि विवाह कतिपय सांस्कारिक पद्धति से हो, तो भी कोई पक्ष विवाह पंजीकृत करवा सकता है, ताकि इसकी वैधता के बारे में बाद में कोई आपत्ति न उठाई जा सके। मैं समझता हूँ कि यह जरूरी है क्योंकि इससे केवल दो पक्ष ही आपस में विवाह नहीं करते जो प्रभावित हैं अपितु इससे अगली पीढ़ी और बाद की पीढि़यां वास्तव में, वे पीढि़यां जो अभी पैदा नहीं हुई हैं, भी प्रभावित होती हैं। वैधता का समग्र प्रश्न इस पर निर्भर है। अतः मेरा अनुरोध है कि कोई भी अनियमितता हो, कोई ऐसा तरीका होना चाहिये जिससे बच्चों की वैधता और उनके विरासत के अधिकारों की रक्षा की जा सके और उनमें अनिश्चितता न बनी रहे। इसमें कोई कठिनाई नहीं हो इसके लिए यह पता लगाया जा सकता है कि कौन-सी औपचारिकतायें आवश्यक हैं जिनका सांस्कारिक विवाह को वैध बनाने के लिए पालन किया जाना चाहिये। विधेयक में इसका भी प्रावधान किया गया है। यथा विधेयक में यह पता लगाने का प्रावधान है कि विवाह को वैध बनाने के लिए किसी क्षेत्र विशेष में कौन-सी विशेष औपचारिकतायें पूरी की जानी चाहिये। उस स्थिति में विवाह को वैध बनाने के लिए उन औपचारिकताओं का पालन करना आवश्यक समझा जायेगा। बहरहाल, यह हो सकता है कि कुछ मामलों में ऐसी औपचारिकतायें पूरी की गई हों या हो सकता है औपचारिकतायें विहित ढंग से पूरी न की गई हों, उस स्थिति में क्या होगा? क्या विवाहित दम्पत्ति ऐसी स्थिति में रहेंगे कि कानून की नजरों में उनके बच्चों को अवैध समझा जाये? इसी कारण संबंधित पक्षों को यह छूट दी गई है कि वे विवाह को वैध बनाने की दृष्टि से अपना विवाह पंजीकृत करवा सकते हैं।