(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 186

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संभवतया यह कह सके कि किसी भी परिस्थिति में पृथक्करण नहीं होना चाहिये। ऐसी काल्पनिक परिस्थितियां हो सकती हैं, जहां पृथक्करण की आवश्यकता न हो हमें चाहिए कि सद्भावना और आपसी सूझबूझ के साथ बैठ कर इन सभी मुद्दों पर विचार करें और यह पता लगायें कि क्या ऐसा किसी विशेष पक्ष के लिये अनिवार्य होगा अथवा नहीं। इसमें किसी प्रकार की विवशता नहीं है। यह पूर्णतया ऐच्छिक है। यदि आप महसूस करते हैं कि निर्वाह करना कठिन हो गया है तो आप न्यायालय में जा सकते हैं। न्यायालय मामले की जांच करेगा और यह पता लगायेगा कि क्या तलाक या विवाह के टूटने के सभी कारण मौजूद हैं औ उसके बाद प्रारम्भिक डिक्री अथवा जो भी हो, जारी करेगा। लेकिन इसका अनिवार्य रूप से यह अर्थ नहीं है कि तलाक की घटनायें दिन प्रतिदिन बढ़ती जायेंगी। यह पूर्णतया लोगों के स्वभाव पर निर्भर करता है। और मैं यह कहना आवश्यक समझता हूँ चूंकि अमेरिका या इंग्लैण्ड में अथवा अन्य देशों में इसने एक विशेष मार्ग अपनाया है, भारत में भी यह वहीं मार्ग अपनायेगा, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। ( पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः यह वही संस्था है।) मैं यह मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हूँ कि भारत में भी वहीं परिणाम सामने आयेंगे।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः बदतर आएँगे।

एक माननीय सदस्यः क्या अब मध्याह्न भोजन का समय नहीं हो गया है?

माननीय उपाध्यक्ष महोदयः मैं समझता हूँ माननीय सदस्य शीघ्र अपना भाषण पूरा करने वाले हैं।

डॉ. पी.के. सेनः मैं अपना भाषण शीघ्र समाप्त करने का पूरा प्रयास कर रहा हूँ, किन्तु मैंने अभी अपना भाषण आरम्भ किया है।

तत्पश्चात्, सभा मध्याह्न भोजन के ढाई बजे तक के लिए स्थगित हुई।

सभा मध्याह्न भोजन के पश्चात् ढाई बजे पुनः एकत्र हुई।

माननीय उपाध्यक्ष (श्री एम. अनंथसयनम आयंगर)ः पीठासीन हुए।

डॉ. पी.के. सेनः महोदय, जब यह सभा मध्याह्न अवकाश के लिए स्थगित हुई, तो मैं तलाक तथा अन्य सम्बद्ध मामलों सम्बन्धी प्रावधानों की अनुज्ञात्मक प्रकृति की बात कर रहा था। बहस के दौरान मुझ से जो प्रश्न पूछा गया वह यह था कि अन्य देशों में इतने अधिक तलाक क्यों हुए हैं।

श्री महावीर त्यागी (उत्तर प्रदेशः सामान्य)ः मेरा व्यवस्था का प्रश्न है। मैं देख रहा हूँ कि केवल माननीय परिवहन और रेल राज्य मंत्री सरकारी सीटों पर बैठे हैं। विचाराधीन विधयेक का सम्बन्ध न तो रेलवे से है और न ही परिवहन से। अतः महोदय,