(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 187

172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

क्या आप माननीय विधि मंत्री को बुलाने की कृपा करेंगे?

माननीय उपाध्यक्षः मुझे यकीन है कि विधि मंत्री शीघ्र यहां होंगे। तब तक, जो अन्य मंत्री यहां हैं ध्यान देंगे।

श्री अजित प्रसाद जैन (उत्तर प्रदेशः सामान्य)ः यह तो सभा की अवमानना जैसी है।

माननीय उपाध्यक्षः अभी तक मुझे कम से कम 36 सदस्यों द्वारा भेजी गयी पर्चियां मिल चुकी हैं।

श्री एम. तिरुमला राव (मद्रासः सामान्य)ः कुछ ने हमारे नाम नहीं भेजे हैं। हमारी पर्चियों यहां पड़ी हैं।

श्री महावीर त्यागीः और बहुत से लोग आपके ध्यान देने की प्रतीक्षा में थे। उन्होंने पर्चियां नहीं भेजी हैं।

माननीय उपाध्यक्षः अतः स्थिति यह है कि इन 36 के अलावा अन्य लोग भी हैं जो मेरे ध्यान देने की कोशिश में थे। इस समय स्थिति यह है कि सरकार ने कल और आज का दिन इस विधेयक के लिए रखा था। मुझे सरकारी काम की स्थिति की जानकारी नहीं है। मैं चर्चा को दबाना भी नहीं चाहता किन्तु मैं नहीं समझता कि हम इस गति से चल सकते हैं। अतः माननीय सदस्यों से मेरा सुझाव है कि वे अपने भाषणों को यथासंभव सीमित करें और उनका भाषण 15 मिनट से अधिक नहीं होना चाहिये।

एक माननीय सदस्यः असंभव। आप सरकार को समय बढ़ाने की सलाह दें।

श्री आर.के. सिधवा (सी.पी. एवं बेरारः सामान्य)ः ऐसे सदस्यों को तरजीह दी जानी चाहिये जिन्हें उम्मीद है कि वे पांच या दस मिनटों में अपना भाषण पूरा कर लेंगे। मैं जानता हूँ कि ऐसे बहुत से सदस्य हैं।

श्री एल. कृष्णस्वामी भारतीः लेकिन क्या वे अपने आश्वासन को निभायेंगे? मुद्दा यही है।

श्री आर.के. सिधवाः मैं अपना पक्का आश्वासन देता हूँ।

श्री विश्वनाथ दास (उड़ीसाः सामान्य)ः उपाध्यक्ष महोदय, क्या मैं आपकी जानकारी में ला सकता हूँ कि माननीय अध्यक्ष ने इस सभा को आश्वासन दिया था कि वह इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए पूरा समय देंगे। और यदि आप एक सदस्य को केवल दस या पन्द्रह मिनट बोलने की अनुमति देते हैं, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा। यह विधेयक एक सामान्य विधेयक से नितान्त भिन्न है। इसका सम्बन्ध करोड़ों लोगों के जीवन, उनके