(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 197

182 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अतः आज अपने अधिकारों के लिये स्वयं उसके अन्दर भावना जागी है। भविष्य में जो नारी समाज होगा वह इस तरह के अन्याय को सहन न कर सकेगा और अन्तर्निहित तानाशाही को जिस तरह से आज तक नारी जाति सहन करती आई है। वह इस तरह की अवहेलना और अनादर कभी बर्दाशत नहीं करेगी। इसलिये मैं समझती हूँ कि यह समय हमारे अनुकूल है जो यह विधेयक हमारे सामने आया है। इसको इस असेम्बली में करतल ध्वनि से पारित हो जाना चाहिये।

इस विधेयक का कई प्रकार से विरोध किया जाता है। मुझे यहां पर इस तरह की बातों का सुनने का अवसर मिला है। नारी जाति के विरुद्ध अश्लील और गंदी बातें कही जाती हैं। स्त्रियों पर लांछन किया जाता है। इस तरह से नारी जाति के विरुद्ध कलंकित और बदनामी की बातें कह कर एक तरह से यहां दुष्प्रचार किया जाता है। यहां पर इस तरह का ख्याल बन गया है कि तलाक का जो अधिकार इस विधेयक में रखा गया है, उसका परिणाम यह होगा कि हमारा समाज नष्ट हो जाएगा, हमारी संस्कृति लक्ष्य भ्रष्ट हो जायेगी। मेरी समझ में नहीं आता कि किस तरह के लोग इस तरह की आशंका करते हैं और किस तरह से लोग इस तरह की बतें करते हैं। लेकिन जहां तक मैंने इस विधेयक का अध्ययन किया है, मुझे ऐसी बात नहीं मिली विवाह-विच्छेद के सबंध में जो नई हो या जैसी कि हमारे धर्म शास्त्रों में हमारे धार्मिक ग्रंथों में इजाजत न दी गई हो। जितने भी कारण सम्बन्ध-विच्छेद के इसमें रखे गये हैं अथवा कि सम्बन्ध विच्छेदकिस प्रकार हो सकता है या किन कारणों से तलाक हो सकता है। मैं समझती हूँ वे सभी कारण हमारे धर्म ग्रंथों में मौजूद हैं। मैं खुद हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में विश्वास करने वाली हूँ। मैं एक हिंदू नारी हूँ। नारी की महिमा और महत्ता किस वस्तु में हैं, वह मैं जानती हूँ। हमारे ऋषि और गुरु-आचार्यों, हमारे कवियों और लेखकों ने बहुत दिनों से, शताब्दियों से भारतीय नारी की महिमा गाई है और उसका बहुत सुन्दर बखान किया है। मैं जानती हूँ कि नारी रूप की महिमा नहीं हैं, वह उसके महान त्याग की महिमा है। मैं समझती हूँ कि वह ऊंचे आदर्श हमारे लिये बहुत अच्छे हैं। आज से नहीं, युगों से भारतीय नारी उन आदर्शों पर चलती रही है और उसके त्याग को यह गौरवमय इतिहास और आदर्श भारतीय संस्कृति और मानव इतिहास में हमेशा कायम रहेगा।

लेकिन समाज के सभी व्यक्ति चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, हर एक ऊंचे आदर्श का पालन कर सकेगा यह असम्भव बात है। महात्मा गाँधी जी संसार में महा पुरुष माने गये हैं। उन्होंने हमारे सामने आदर्श रखे हैं। लेकिन अनुयायी होते हुये भी हम स्वयं उन पर न चल सकें। इसी तरह समाज की व्यवस्था है और इसी तरह संसार की व्यवस्था है। अगर यह संसार और यह हमारा भारतीय समाज विशेषतः अपने आदर्शों का पालन करने लगे, तो मैं समझती हूँ कि यह संसार, संसार न रह कर स्वर्ग बन जाये।

जब कोई उच्च आदर्श लोगों के सामने रखा जाता है तो उसके उचित वातावरण बनाने के लिए बहुत तरह के उपाय करने होते हैं। जिस तरह से हमारे यहां हिंदुओं की विवाह