184 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पसन्द करते हैं, उसके साथ शादी कर सकते हैं। ज्यादा से ज्यादा अगर बिरादरी में उन पर कुछ किया गया तो यह हुआ कि कुछ दण्ड दे दिया या जाति से अलग कर दिया और एक जाति-भोज देने के बाद वह फिर जाति में सम्मिलित हो जाते हैं। इस विधेयक के पास होने से उन जातियों को बहुत लाभ होगा, जिनमें सम्बन्ध-विच्छेद और तलाक को इतना हलका बना दिया गया है। उनके ऊपर भी यह विधेयक प्रतिबन्ध लगा देगा और इससे बहुत बड़ा लाभ यह होने वाला है कि जो हमारी पिछड़ी हुई जातियां हैं, जिनमें सांस्कृतिक पृष्ठभूमि नहीं है, वह सुसंस्कृत हो जायेंगी और नैतिक मापदंडों का विकास होगा। यह बहुत बड़ी खूबी मुझको इस विधेयक में मालूम होती है।
सबसे अधिक विरोध जो इस हिंदू संहिता विधेयक का किया जा रहा है, वह मैं समझती हूँ सम्पति के कारण किया जा रहा है कि इस हिंदू संहिता विधेयक में पिता की सम्पत्ति में एक लड़की को भी लड़के के बराबर उत्तराधिकार दिया जा रहा है। इस विरोध में तरह-तरह की बातें कही जा रही हैं। कुछ वक्ताओं का कहना है कि इसमें भाई-बहन का जो एक सरल स्नेह है, एक स्वाभाविक स्नेह है, वह नष्ट हो जायेगा और हमारी परम्परा, हमारे परिवार की सारी व्यवस्था इससे नष्ट हो जाने वाली है। यह बात मेरी समझ में नहीं आती, क्योंकि आज देखा यह जाता है कि किसी पिता के अगर दो पुत्र हैं या चार पुत्र हैं तो सब जगह यह जरूरी नहीं है कि भाइयों में परस्पर लड़ाइयां हों, झगड़ें हों। लेकिन साथ ही ऐसे भी किस्से सुनने में आते हैं कि वह एक दूसरे की जान के दुश्मन हो जाते हैं। तो इस तरह मैं यह समझती हूँ कि कल को यह मान लिया जाये कि सम्पत्ति का अधिकार होने के बाद भाई बहन में इस तरह का झगड़ा होने लगेगा और चुंकि इस तरह के झगड़े भाई-भाई में भी होते हैं और इस पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता। उस समय कोई भी संस्कृति की दुहाई देने वाले ने क्या कभी इसका प्रचार किया है कि इस विरासत की सम्पत्ति से भाई-भाई में झगड़े होते हैं और यह जाना चाहिए? कया यह झगड़े हमारी सांस्कृति के अनुकूल हैं? हमारे धर्म की जो महत्ता है वह है परस्पर के सरल स्नेह में, प्रेम में और आपस के अच्छे सम्बन्ध बनाने में। यह हमारे धर्म के अनुसार हमारी संस्कृति है। मुझे और ऐसे दुष्टान्त दिखाई देते हैं कि जहां एक बहन है वह अपने भाई को बहुत अधिक प्रेम करती है। प्रेम बहुत प्रकार के होते हैं लेकिन यह प्रेम जो एक बहन अपने भाई के प्रति रखती है वह मैं समझती हूँ कि इतना सरल, इतना स्वच्छ होता है कि ऐसा प्रेम और नहीं हो सकता। इस प्रकार का प्रेम, भाई के प्रति उसके मन में होता है। हमारे वर्तमान कानून में प्रावधान है कि माँ का जो धन होता था, ‘स्त्री-धन’ और जो आभूषण माँ को मिलते थे, उसकी अधिकारिणी लड़की होती थी। लेकिन हर जगह यह देखा गया है कि बहन ने बैठ कर भाइयों के साथ उन अपने आभूषणों को बांटा है और किसी ने उसे कहीं लड़ते-झगड़ते नहीं देखा। यदि हमारी स्त्री का ऊंचा आदर्श कायम रहा है तो बहन भाई के लिये अपना सब कुछ त्याग करने को सदा प्रस्तुत रहेगी। ऐसी बहुत कम अवसर होंगे, जहां आपस में लड़ाइयां हुई हों। अगर थोड़ी देर के लिए यह भी माना