192 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मेरे पास पचास एकड़ भूमि है। मेरे दो बेटे हैं। मेरे दो बेटे 25-25 एकड़ भूमि के वारिस हैं। मेरे पहले बेटे के चार बेटे हैं। प्रत्येक लड़के के हिस्से में केवल छह एकड़ भूमि आती है। क्या हमारी विरासत की प्रणाली में भूमि संचित हो सकती है? बिल्कुल नहीं। यह सर्वोत्तम किस्म का समाजवादी ढांचा है। आप इस समाजवादी ढांचे को तबाह करना चाहते हैं और इसके स्थान पर एक व्यक्तिपरक सभ्यता लाना चाहते हैं, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की अपनी सम्पत्ति होती है, जिसमें सम्पत्ति पर जन्म से नहीं, अपितु उत्तरजीविता से उत्तराधिकार मिलता है। तब क्या होता है?
व्यक्तिपरक सम्पत्ति अस्तित्व में आती है। संभवतया अगला कदम डॉ. अम्बेडकर का सामान्य जन के लिए प्रजनन विधि के बारे में विधेयक होगा। तब आप एक अभिजात तंत्र का सृजन तथा रखरखाव करेंगे। आप वर्गों में बंटे एक समाज का निर्माण कर रहे हैं न कि वर्गविहीन समाज का। एक वर्गविहीन समाज का स्थान, जिस में विद्या और सम्पत्ति, विद्या और धन संतुलित होते हैं, एक ऐसा समाज ले लेगा जिसमें सम्पत्ति का बोलबाला होगा। पश्चिमी देशों में ऐसा ही होता है। यह ऐसी चीज है जो पूर्व में नहीं हो सकती। यहां हमने एक सामाजिक संगठन प्रणाली के माध्यम से धन और संस्कृति को संतुलित कर दिया है और उन्हें अस्तित्व में लाने के बाद हमने धन की अपेक्षा संस्कृति को अधिक महत्व दिया है। धन का यहाँ गौण स्थान है। अब आप क्या करने जा रहे हैं? आप एक वकील को दस लाख रुपये सिंंचत करने की अनुमति देते हैं। वह सर्वोच्च मालिक है। उसे वह पूरा धन मिल गया है जो उसके भाई उसे इंग्लैण्ड भेजने और विधिवेता (बेरिस्टर-एट-लॉ)) बनाने के लिए देते। लेकिन उसने जो शिक्षा ग्रहण की है वह विधि के अनुसार उसकी अपनी सम्पत्ति है। यह कानून अंग्रेजों ने बनाया है, हमें उनके इन आदर्शों के लिए उनका धन्यवाद करना चाहिये। अब, जबकि अन्य लोगों को, अन्य भाइयों को, कृषकों तथा व्यापारियों को, जिन्होंने उसी प्रकार धर्मपरायण होकर परिश्रम किया है, शिक्षित विधिवेता के साथ अपनी सम्पत्ति बांटनी होगी, विधिवेता को अपनी सम्पत्ति उनके दो भाइयों के साथ बांटने से छूट है। क्या यह न्याय है? हमारे समाज ने जो नेक मानक अपनाये हैं उनकी तुलना में यह अन्यायपूर्ण मूर्खता है।
अब हम यहां एक क्षण के लिए रुकते हैं और एक प्रश्न पूछते हैंः ‘क्या आपने इस समाज के ढांचे और कृत्यों के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और नैतिक पहलुओं पर विचार करने के लिए कोई आयोग नियुक्त किया है? क्या आपने इस ढांचे के पीछे मनोविज्ञान के अध्ययन पर आधारित प्रतिवेदन प्राप्त किया है, जिसने निस्संदेह कम से कम पांच हजार वर्षों की अवधि के लिए समय के थपेड़ों को सहन किया है। यह अवधि तेरह हजार वर्ष भी हो सकती है तथा तीस हजार वर्ष भी हो सकती है क्योंकि महाभारत और वैदिक युग के बारे में, हमारे समाज के बारे में और प्राचीन सभ्यता के बारे में ये तीन वृतांत मिलते हैं। यह कैसी विडम्बना है कि आप ऐसा नहीं करते। यदि