(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 214

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चाहिये। जर्मनी में एक आर्थिक परिषद हुआ करती थी, जो ऐसे अधिकांश मामलों से निपटती थी जिनके लिए विशेष जानकारी की आवश्यकता होती है। फ्रेच टैगय् उस संस्था की सिफारिशों को स्वीकार किया करता था। अतः हमें इस मामले में धीरे-धीरे और सोच-समझकर अग्रसर होना चाहिये ताकि हम जान सकें कि हम कहां खड़े हैं।

अब मैं विधेयक के कुछ मुद्दों पर आता हूँ और मैं आपका अधिक समय नहीं लूंगा। विधेयक के कुछ प्रावधान काफी अच्छे हैं। मैं चाहता हूँ कि अदालती विवाह सांस्कारिक विवाह के ऊपर हो। अदालती विवाह दो व्यक्तियों के बीच एक लेनदेन को पंजीकृत करने का केवल दस्तावेज है। यह एक संविदा है। ज्यों ही एक दस्तावेज लिखा जाता है, झगड़ा खड़ा हो जाता है चाहे इरादा सही हो, चाहे विधि के अनुसार यह मान्य हो किन्तु जब विवाह सांस्कारिक ढंग से होता है तो इसके विरुद्ध कोई अपील नहीं होती। वुद्ध पुरोहित को कभी अपने जीवन में न्यायालय में खड़े होने और विवाह की वास्तविकता के बारे में गवाही देने के लिए नहीं बुलाया जाता। विवाह हो जाता है और इसे कोई चुनौती नहीं देता_ यह बोले गये शब्द की गरिमा की तरह है। जब राष्ट्र ने बोले गये शब्द की गरिमा को बनाये रखा है जो अंग्रेजी शासनकाल में और न्यायालयों के प्रभाव में समाप्त हो गई है, तो मैं कहूंगा कि हमें एक बार फिर अपने चरित्र का निर्माण करना चाहिये। किन्तु कुछ ऐसी परिस्थितियां हैं, जैसे कि मेरे एक मित्र के मामले में, विवाह की वेदी पर आकस्मात् यह पता चला है कि उसकी लड़की और उसके होने वाले दामाद का गोत्र एक ही था। वे आर्थिक कारणों से भी संभवतया विवाह को तोड़ नहीं सकते थे, धार्मिक कारण तो दूर की बात है। अतः उन्होंने तुरन्त संस्कार किया और फिर उसके बाद विवाह पंजीयक के पास गये और इसका पंजीकरण करवा लिया। हमें अपने विवाह पंजीकृत करवाने की छूट होनी चाहिये। यह एक बड़ा विशेषाधिकार है और मैं यह भी चाहता हूँ कि सम्पत्ति में लड़की के हिस्से का प्रश्न एक बार हमेशा के लिए हल कर लिया जाये। मैं काफी समय से यह महसूस कर रहा हूँ कि बाप की सम्पत्ति में बेटों के साथ बेटी को भी बराबर का उत्तराधिकार होना चाहिये। अब मुझे दिखाई देता है कि इससे हमारे सामाजिक और आर्थिक ढांचे में अनन्त उलझनें पैदा होंगी। मेरे एक मित्र की छः बेटियां हैं और एक बेटा है। मैंने लड़कियों से एक-एक करके पूछा कि क्या वे अपने बाप की सम्पत्ति का हिस्सा लेना चाहेंगी। उन्होंने कहा, फ्नहीं, इससे हमारे भाइयों के साथ झगड़ा होगा हम यह नहीं चाहतीं। हमारे पास हमारे पति की सम्पत्ति है और वह सदैव हमारे पास रहती है।य् तथापि यह उन्हें उस प्रकार उपलब्ध नहीं है जिस प्रकार स्त्रीधन उन्हें उपलब्ध होता है। स्त्री धन एक अत्यन्त उत्तम चीज है और मैं यह जानना चाहता हूँ कि विश्व में इसके अन्यत्र समानान्तर कोई स्त्रीधन है? स्त्री धन एक ऐसा उपाय है जिसके माध्यम से विवाह के समय लड़की को दिया गया स्त्रीधन पूरी तरह लड़की की सम्पत्ति बन जाता है जिसे पति या बाप या कोई व्यक्ति नहीं छू सकता। यह परिवार की आरक्षित निधि है और जिस पर उसका पूरा स्वामित्व है और जब उसका