(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 215

200 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पति काफी बीमार हो जाता है तो डाक्टर की फीस आदि का भुगतान करने के लिए वह अपने जेवर बेचने के लिए बाज़ार जाती है। यदि पति स्वस्थ और खुशहाल रहता है और यदि पति की मृत्यु हो जाती है, तो यह उसकी अपने स्वामी के प्रति अन्तिम सेवा होती है। ऐसी आरक्षित निधि समाप्त हो जाने पर श्री टी.वी. सेषागिरी अय्यर के विधेयक के अन्तर्गत, जो 15 वर्ष पहले कानून बन गया, अब पति की सम्पत्ति में पत्नी के हिस्से को मान्यता दी जाने लगी है। किन्तु पति की मृत्यु के पश्चात् ही उसे पति की सम्पत्ति में बेटों के बराबर हिस्सा मिलता है और उसे तब तक मिलता है जब तक वह जीवित रहती है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए कि उनकी राजनैतिक स्थिरता डांवाडोल हो सकती है, अंग्रेज लोग इस देश की धार्मिक संस्थाओं में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते थे। फिर भी हमारे कानून में अब मामूली परिवर्तन किया गया है और जैसा कि पहले एक माननीय सदस्य ने बताया है कि इसमें कोई भारी परिवर्तन नहीं किया गया है। दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि अंग्रेज लोगों ने राजनैतिक कारणों से इस देश के सामाजिक रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप करना उचित नहीं समझा और इसलिए कानून जड़ीभूत हो गया। हर देश में रीति-रिवाज बदलते रहते हैं और जब राजा सामाजिक रीति-रिवाजों में किसी परिवर्तन को अंगीकार कर लेता है तो तुरन्त ही वह कानून बन जाता है और इससे पूर समाज को एक दिशा मिलती है। किन्तु दुर्भाग्य से हमारे देश में हजारों वर्ष तक कोई देशी राजा नहीं हुए और अंग्रेजों के आने के बाद उन्होंने सामाजिक ढांचे में सामाजिक परिवर्तन लाने के सभी प्रयासों का विरोध किया। अतः रीति-रिवाज गतिहीन हो गये, अतः हमारा यह कर्त्तव्य है कि हम उन गतिहीन रीति-रिवाजों को लचीला, संवेदनशील और परिवर्तनशील बनायें।

ऐसा करने की बजाय यदि हम अकस्मात रीति-रिवाज को एक-दूसरे के विरुद्ध फैंकते हैं तो दोनों पत्थर टूटेंगे। अतः परिवर्तन लाने का यह तरीका सही नहीं है, क्योंकि परम्परागत विधि में परिवर्तन लाने का उद्देश्य सामाजिक परिवर्तन लाना होना चाहिये।

अब जहां तक लड़की को हिस्सा देने की प्रथा का सम्बन्ध है, मैं इस बात से सहमत हूँ कि उसे हिस्सा मिलना चाहिये। किन्तु मैं एक फेरबदल करना चाहता हूँ और वह यह है कि ज्यों ही उसका विवाह होता है वह पति की सम्पत्ति में हिस्सेदार बन जाती है और इसे पति को दुर्व्यवहार करने का अवसर नहीं मिलता जैसा कि दुर्भाग्यवश कभी-कभी होता है। इसके बाद हम तलाक के प्रश्न पर आते हैं। मैंने कई महिलाओं से बात की है। आज सुबह चार महिलाएं मेरे पास आईं। वे अच्छी महिलाएँ हैं, काफी सुसभ्य हैं और उनमें से एक ऐसी भी थी जिसका मुझसे परिचय करवाया गया और जिसको उसके पति ने त्याग दिया था। उन्होंने कहा कि केवल ऐसी महिलायें ही इस विधान को अपना समर्थन देने से इन्कार नहीं कर रही हैं जो खुश हैं अपितु ऐसी महिलायें भी इसको समर्थन देने के लिए तैयार नहीं हैं जो नाखुश हैं, पुरुष की नाराजगी