203
आचार्य जे.बी. कृपलानी (यू.पी.ः सामान्य)ः महोदय, सभा के कुछ सदस्यों को आशंका है कि मैं सरकार की नीति के विरुद्ध बोलूंगा। यद्यपि मैंने इस सभा में केवल एक बार भाषण दिया है, फिर भी कुछ लोगों को आशंका है और मैं उस आशंका को दूर करना चाहता हूँ। मैं इस विधेयक के मुख्य सिद्धांतों का समर्थन करता हूँ। मेरे ऐसा करने का कारण यह है कि मैं नहीं चाहता कि यह सरकार एक गौण मसले पर, एक सामाजिक मसले पर त्यागपत्र दे। मैं चाहता हूँ कि अन्य महत्वपूर्ण राजनैतिक और आर्थिक मसलों पर त्याग-पत्र दे। उदाहरण के तौर पर मैं चाहूंगा कि यह चीनी घोटाले के प्रश्न पर त्याग-पत्र दे, जिसके कारण गरीबों के बच्चे को चीनी नहीं मिल सकी लेकिन ऐसे लोग टनों चीनी ले सकते थे जो उच्च मूल्य देने को तैयार थे। एक लोकतांत्रिक देश में किसी अन्य सरकार ने ऐसे प्रश्न पर त्याग-पत्र दे दिया होता। यह सरकार ऐसे मामलों को लेकर जाती है तो मुझे कोई खेद नहीं होगा, किन्तु मैं नही चाहता कि यह एक गौण सामाजिक मुद्दे पर त्याग-पत्र दें...
एक माननीय सदस्यः चीनी इस विधेयक से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है।
आचार्य जे.बी. कृपलानीः फिर भी यह उतनी मीठी नहीं है।
फिर भी यदि मेरे ऊपर ऐसे लोगों का दबाव नहीं होता जिनका मैं विरोध नहीं कर सकता तो, मैं इस विधेयक का समर्थन नहीं करता। मुझे घर पर बताया गया है कि मुझे इस विधेयक का समर्थन करना है। मैंने कहा कि मुझे हिंदू विधि के बारे में कोई जानकारी नहीं है कि हिंदू विधि कई ग्रंथों में फैली हुई है और इस पर टीका के रूप में कई अन्य ग्रंथ लिखे गये हैं और जिसे मैं समझा ही नहीं हूँ, उसका समर्थन या विरोध कैसे कर सकता हूँ? इस पर मुझे फौरन बताया गयाµफ्मैं तुम्हें इसे समझा दूंगाय्।
एक माननीय सदस्यः आपके शिक्षक कौन थे?
आचार्य जे.बी. कृपलानीः इस प्रकार मुझे परदे के पीछे कुछ भाषण सुनने पड़े। मुझे आश्वासन दिया गया कि मेरे शिक्षक को इस सभा के सबसे बड़े अधिकारी स्वयं सम्मानीय डॉ. अम्बेडकर द्वार हिदायत दी गई है। परदे के पीछे भाषण समाप्त होने के बाद मैं उतना ही बुद्धिमान या बेवकूफ था, जितना कि विद्यालय या कॉलेज में अपने अध्यापकों के भाषण के बाद हुआ करता था। मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि मेरे अध्यापक मेरे से अधिक बेवकूफ थे।
जब मैं प्राध्यापक था तो मैं सोचता था कि छात्र मेरे बारे में यही कहेंगे। यह जानते हुए जब मैं कक्षा में प्रवेश करता था तो मैं सदैव कहता था फ्सज्जनों, आप की हाजिरी पक्की है और मैं हाजिरी लगा देता हूँ तो आप उसके बाद जा सकते हैं क्योंकि मैं जानता हूँ आप मुझे अपनी विद्वता के लिए उससे अधिक श्रेय देंगे जितना मैं अपने अध्यापकों को देता था।य्