204 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
महोदय, मैंने इस विधेयक का समर्थन करने की शपथ ली है और मुझे इसका अवश्य समर्थन करना चाहिये, क्योंकि मैं जानता हूँ कि यद्यपि मेरी पत्नी यहाँ उपस्थित नहीं है, लेकिन वह वापस आएगी, तो वह मुझसे न केवल वित्तीय अपितु नैतिक और बौद्धिक ब्यौरा भी लेगी।
महोदय, मेरे लिए यह धर्म संकट का प्रश्न नहीं है मेरे लिये यह मेरा घर संकट में हैं, का प्रश्न है। बहुत कहा गया है कि हिंदू धर्म संकट में है। मुझे यह बात समझ में नहीं आई। हिंदू धर्म तब संकट में नहीं होता, जब हिंदू, बदमाश, व्यभिचारी, चोर बाजारी करने वाले और रिश्वतखोर होते हैं। हिंदू धर्म को इन लोगों से खतरा नहीं है किन्तु हिंदू धर्म को उन लोगों से खतरा है जो एक कानून विशेष में सुधार लाना चाहते हैं। वे जरूरत से ज्यादा जोशीले हो सकते हैं, किंतु भौतिक पदार्थों में भ्रष्ट होने की अपेक्षा आदर्शवादी चीजों में अधिक जोशीला होना बेहतर है। हमारी इस मानसिकता के कारण राष्ट्रपिता की हत्या हुई। यह माना जाता है कि हत्यारा उस व्यक्ति से बेहतर हिंदू था जो गीता और उपनिषदों के उच्चतम आदर्शों के अनुसार जीवनयापन करता था और जो हमारे धर्म ग्रंथों के उपदेशों को ध्यान में रखते हुए अपना जीवन बिताता था। मैं चाहता हूँ कि हिंदू समाज अपने धर्म के बारे में ऐसी गलत धारणाओं को तिलांजलि दे। हमारा धर्म हत्यारों और चोरों से नहीं बनता_ यह साधुओं, सन्यासियों और महात्माओं से बनता है।
इसका दूसरा पहलू भी है। यहाँ काफी उलझन पैदा की गई है। एक पक्ष का कहना है कि धर्म संकट में है और दूसरे पक्ष का कहना है कि प्रगति का आधुनिक धर्म खतरे में है। यदि आप विधेयक का समर्थन नहीं करते, तो आप प्रतिक्रियावादी हैं।
मैं आपको बताऊंगा कि मैंने इस विधेयक का समर्थन करने का मन कैसे बनाया है। मैंने एक कारण आपको पहले ही बता दिया है। दूसरा कारण मैं आपको अब बताऊंगा।
एक महिला थी और उसने दूसरी महिला से कानाफूसी की फ्कृपलानी विधेयक का समर्थन नहीं करेगा_ वह प्रतिक्रियावादी है।य्
श्री बी.एल. सोंधीः क्या वे दोनों इस सभा की सदस्या थीं।
आचार्य जे.बी. कृपलानीः वे माननीय सदस्य थीं, मात्र सदस्य नहीं थीं। उन्हीं में से एक ने मुझे विश्वास में लेते हुए बताया, फ्मैंने विरोध किया और कहा कि कृपलानी प्रगतिवादी है।य् अतः यह मेरी इज्जत का प्रश्न था। आप देखिये कितना प्रखर प्रचार किया जाता है। एक महिला दूसरी महिला को विश्वास में लेकर कुछ बताती है और वह कथा मुझे बता देती है। अब मैं क्या करूंगा? मैं अपने आपको प्रतिक्रियावादी नहीं समझ सकता और न ही प्रगतिशीलः मुझे गैर-हिंदू पुकारा जा सकता है। किन्तु एक आधुनिक व्यक्ति का आधुनिक न होना उसके धर्मविहीन होने से बड़ा कलंक है। हो