हिंदू विवाह वैधता विधेयक - Page 22

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भारत के शेष भागों की अपेक्षा कहीं आगे हैं। यह संहिता उस हद तक भी सुधार नहीं सुझाती। उनके लिए इस संहिता में सामाजिक सुधार नहीं है, बल्कि यह उन्हें पीछे ले जाती है। यदि इस संहिता को पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में किसी हिंदू या सिख को दिखाया जायेगा, तो वह कहेगा फ्श्रीमान, आप क्या कर रहे हैं? आप तो हमें पीछे धकेल रहे हैं। हम इस सबसे बहुत आगे हैं। आप हमें फिर भी पीछे ले जाना चाहते हैं। पंजाब के लोग इससे लाभान्वित नहीं होंगे।य् प्रवर समिति से आई वर्तमान संहिता में पंजाब के लोगों की आवश्यकतायें बहुत पीछे छूट गई हैं। ये आवश्यकतायें केवल पीछे ही नहीं छूटी हैं, अपितु इस विधेयक में कछ बातें हम पर ये दबाव डालती हैं। यदि यह विधेयक अपने वर्तमान रूप में ही बना रहता है तो हम इस विधेयक को बाहर फैंक दें। यदि हम अपनी संस्थाओं को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो वे इस विधेयक के वर्तमान स्वरूप में सुरक्षित नहीं रखी जा सकतीं और इस प्रकार यह विधेयक आक्रोश पैदा करने वाला होता है।

श्री मोहन लाल गौतम (उत्तर प्रदेशः सामान्य)ः इस बारे में कोई उदाहरण दीजिये।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः मैं अभी एक उदाहरण देता हूँ। इस भूमिका के बाद, श्रीमान आपकी अनुमति से मैं यह आपत्ति प्रस्तुत करने का निवेदन करता हूँ कि मुझे इस विधेयक के विरुद्ध उठना है और यह कहना है कि मैं किस सीमा तक इस विधेयक का समर्थन करता हूँ। इस विधेयक में ऐसे अनेक प्रावधान हैं जिसके बारे में किसी को कोई आपत्ति नहीं हो सकती। कुछ ही ऐसे लोग होंगे जो कहना चाहेंगे कि वे इस विधेयक के सभी उपबंधों के विरुद्ध हैं। परन्तु श्रीमान, यदि आप इस विधेयक का अध्ययन करें तो आपको यह पता लगेगा कि प्रवर समिति के सत्रह सदस्यों में से ग्यारह सदस्यों ने इस विधेयक पर असहमति प्रकट की है। और वे कौन हैं? उनमें श्रीमती अम्मू स्वामीनाधन और श्रीमती रेणुका रे हैं। इन दोनों महिलाओं की असहमति की टिप्पणियां भी हैं।

श्रीमती रेणुका रे (पश्चिम बंगालः सामान्य)ः वे टिप्पणियां मूलभूत सिद्धांतों पवांर नहीं हैं।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः मैं इसी विषय पर आ रहा हूँ। यदि सच बात कही जाए तो ग्यारह सदस्य जिन्होंने असहमति की टिप्पणियाँ दी हैं, इस विधेयक का विरोध किया है जो प्रवर समिति के समक्ष से आया है। अब मैं यह निवेदन कर रहा हूँ कि इस पर असहमति का नोट किन सदस्यों ने लिखा है। असहमति की टिप्पणी देने वालों में से एक सदस्य बक्शी टेक चन्द हैं, जिन्होंने जीवनपर्यन्त समाज सुधार के लिए कार्य किया है और वे समाज सुधारों के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। यदि वे भी असहमति की टिप्पणी लिखते हैं तो यह हमारे सोचने के लिए है कि हम कहां जा रहे हैं? यदि इन असहमति की टिप्पणियाँ को सावधानी से पढ़ा जायेगा तो यह स्पष्ट हो जायेगा कि सत्रह सदस्यों में