206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है। इस पर वे मेरी अज्ञानता पर मुस्कुरा देती है और कोई उत्तर नहीं देती। इन मामलों में मैं समझत हूँ हम बहुत घाटे में हैं। वे महान जीवनदाता हैं। कलाकार निर्जीव वस्तुओं का सृजन करता है। पर महिलायें भगवान की मूर्तियां बनाती हैं, जो कई बार विकृत होकर शैतान की मूर्तियां भी बन जाती हैं। निस्संदेह इन चीजों के मामलों में प्रकृति ने हमारे रास्ते में एक तरह का अवरोध खड़ा किया है, हम महिलाओं के समान नहीं हो सकते। किन्तु कई अन्य चीजों में हम महिलाओं के साथ समानता का दर्जा भी प्राप्त कर सकते हैं।
जहां तक महिलाओं का पुरुषों के साथ समानता प्राप्त करने का प्रश्न का सम्बन्ध है, भारत में उन्हें यह समानता पहले ही प्राप्त है। आप जानते हैं कि स्वराज प्राप्त होने के पश्चात् तुरन्त ही हमने राज्यपाल के रूप में एक महिला की नियुक्ति की। संयुक्त राज्य अमेरिका को आजादी प्राप्त किये दो सौ वर्ष हो गये हैं और वहां पर 48 राज्य हैं किन्तु मैं नहीं समझता कि उन्होंने एक बार भी किसी महिला को राज्यपाल नियुक्त किया है। निस्संदेह मेरा इतिहास का ज्ञान पुराना हो सकता है और यदि मैं कोई गलत चीज कहता हूँ तो उसमें शुद्धि की जा सकती है, परन्तु मेरा विश्वास है कि कभी किसी महिला को संघ में मंत्री नियुक्त नहीं किया गया है। मैं यह भी कह सकता हूँ कि इंग्लैण्ड जैसे देश में जहां महिला-शिक्षा व्यापक है, मैं नहीं समझता कि अभी तक किसी महिला को मंत्री परिषद का सदस्य बनाया गया है। मैं अनेक सह-मंत्रियों की बात नहीं कर रहा हूँµऐसे कई मंत्री तो हमने यहां भी बनाये हैं। किन्तु मैं कैबनेट मंत्रियों की बात कर रहा हूँ। जहां तक मैं जानता हूँ इंग्लैण्ड में अभी तक कोई महिला कैविनेट मंत्री नहीं बनी है। मैं यह भी नही जानता कि कभी इंग्लैण्ड या अमेरिका में कोई महिला राजदूत या राजनयिक बनाई गई या नहीं। फिर भी आपको याद रखना होगा कि हमारी एक प्रमुख राजदूत महिला है।
श्री आर.के. सिधवाः महोदय, हमें अपनी महिलाओं पर गर्व है।
आचार्य जे.बी. कृपलानीः शायद, श्री सिधवा सोचते हैं, कि मुझे गर्व नहीं है। मुझे इस पर बड़ा गर्व है। किन्तु मैं यहाँ समानता, न कि गर्व के बारे में सोच रहा हूँ। मैं कहा हूँ, फ्हमने महिलाओं को समानता दी है और क्या अब हमें महिलाओं के साथ समानता का अधिकार मिलेगा। मैं बहुत उत्पीडि़त हूँ क्योंकि मैं एक बूढ़ा व्यक्ति ही तो हूँ। मुझे ज्ञात हुआ है कि बूढ़ों का आदर होना चाहिये। किन्तु जब मेरी बैठक में कोई लड़की झांकती आती है तो मुझे डिब्बे में बन्द एक जैक की तरह फटफटाना पड़ता है।
(इसी समय उपाध्यक्ष श्री एम. अनंथसयनम अयंगर पीठासीन हुए।)
पहले मैं ऐसा नहीं करता था। इतना ही नहीं, महोदय, मैं आपको बताना चाहता हूँ। कि जब मेरी पत्नी भी बैठक में आती है तो मैं खड़ा हो जाता हूँ। क्या आप जानते हैं क्यों? क्योंकि कोई गंवार युवक वहां बैठा हो तो उसे आधुनिक शिष्टाचार की जानकारी नहीं होगी और वह खड़ा नहीं होगा। मैं उसे उदाहरण देने के लिए ही खड़ा होता हूँ। मैं