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चाहता हूँ कि समानता आये, क्योंकि आप देखिये एक पुरुष होने के नाते मेरा कर्त्तव्य बनता है कि जब कोई महिला आये तो मैं खड़ा हो जाऊं, जबकि मैं जानता हूँ कि जब हमारे प्रधानमंत्री या कांग्रेस के अध्यक्ष कमरे मे प्रवेश करते हैं तो मैंने देखा है कि वहाँ जवान महिलाएं अपने स्थानों पर बैठी रहती हैं। पुरुषों के प्रति यह एक बहुत बड़ा अन्याय है। मेरा अनुभव रहा है कि जब बाजार में एक पुरुष और एक महिला के बीच झगड़ा होता है, गुप्त झगड़ों के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है, यहां क्लब में कोई झगड़ा होता है और वहाँ कोई पुरुष महिला को चोट पहुंचाता है तो क्या आप जानते हैं कि क्या होता है? वहाँ प्रायः विद्रोह हो जायेगा और हर व्यक्ति पुरुष को कायर कहेगा और यह ठीक भी है। किन्तु मान लो कि पुरुष की पिटाई कोई महिला करती है तो आप जानते हैं कि क्या होगा? मैं समझता हूँ कि वह बहुत हास्यास्पद दिखाई देगा और इसके बजाय कि कोई व्यक्ति उससे सहानुभूति जताये वह उसका मजाक उड़ाएगा और यह ठीक भी है। हम चाहे पीटे जायें, हमारी दोनों तरह से हार होती है। मैं चाहता हूँ कि यह संतुलन बहाल किया जाये और पुरुष को बचाने के लिए भी कुछ समानता होनी चाहिये।
एक और चीज़ भी है। न केवल समाज में हम घाटे में रहते हैं अपितु कानून भी हमारे विरुद्ध है जैसा कि हमारे विधि मंत्री भी स्वीकार करेंगे। मान लो कि एक पुरुष एक महिला के साथ भाग जाता है तो कानून की दृष्टि में पुरुष जिम्मेदार है। मान लो एक महिला एक पुरुष के साथ भाग जाती है तो भी पुरुष ही जिम्मेदार है। मुझे एक विशेषज्ञ, बहुत आधुनिक विशेषज्ञ से पता चला है कि प्रायः महिला ही इसके पीछे होती है। हम आक्रामक हों या वे आक्रामक हों, पर कानून की मार हम पर ही पड़ती है। हम दोनों ओर से पीडि़त हैं। अतः मैं इस सभा से अनुरोध करता हूँ कि कुछ समानता लाई जाये ताकि हम पुरुष लोग भी अधिक आजादी से सांस ले सकें और यदि हमें पीटा जाता है, तो हम भी समान रूप से पीट सकें तब हमारा मजाक न बने और कानून, अधिक बलशाली पक्ष अर्थात् महिलाओं के समर्थन में न आयें। अब आप समझ गए होंगे कि मैं क्यों इस विधेयक का समर्थन कर रहा हूँ।
अब हम ब्यौरे में जायेंगे। सब से पहले सम्पत्ति का प्रश्न आता है। मुझे वास्तव में यह समझ में नहीं आता कि हम कांग्रेसजन, जिन्होंने निजी सम्पत्ति का उन्मूलन करने की शपथ ली है, क्यों सोचते हैं कि एक को हिस्सा मिलना चाहिये और दूसरे को हिस्सा नहीं मिलना चाहिये। इस देश में यह एक विचित्र बात है जो मुझे दूसरे देशों में देखने में नहीं आई।
श्री लक्ष्मी नारायण साहू (उड़ीसाः सामान्य)ः मैं एक चीज़ जानना चाहता हूँ। क्या कांग्रेस ने निजी सम्पत्ति का उन्मूलन करने की शपथ ली है?
माननीय उपाध्यक्षः यह माननीय सदस्य का मत है।
आचार्य जे. बी. कृपलानीः मैं समझता हूँ यदि काँग्रेस के संकल्प ध्यान से पढ़े जायें