(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 223

208 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

तो स्पष्ट हो जायेगा कि कांग्रेस संचित निजी सम्पत्ति, न कि निजी सम्पत्ति जो कि प्रयोग में हैं के उन्मूलन के पक्ष में है। किन्तु जैसाकि उपाध्यक्ष महोदय ने ठीक ही कहा है यह अभिमत का प्रश्न है। मैं महसूस कर रहा हूँ कि यहां सभी लोगों द्वारा विद्यमान सम्पत्ति के वितरण पर विचार किया जा रहा है और नई संपत्ति का सृजन करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। यहां तक कि हमारे समाजवादी मित्र भी नई सम्पत्ति के सृजन की नहीं अपितु हमारे पास इस समय जो थोड़ी-सी सम्पत्ति है उसका पुनः वितरण करने के बारे में सोचते हैं। जहां तक थोड़ी बहुत विद्यमान सम्पत्ति का सम्बन्ध है, यदि यह देश में रहती है तो मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह महिला को जाती है या पुरुष को। पर राष्ट्र की सम्पत्ति कम नहीं होनी चाहिये। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यदि लोग रिश्वत लेते हैं या काला बाजारी करते हैं तो मुझे परवाह नहीं है, क्योंकि सम्पत्ति भारत से बाहर तो नहीं जाती। यह कहीं न कहीं भारत में ही रहती है। मैं केवल इसकी नैतिकता के बारे में सोचता हूँ जो हमारे सार्वजनिक जीवन और हमारे निजी आचरण को नष्ट कर रही है। जहां तक सम्पत्ति का सम्बन्ध है, यह अधिक चिन्ता का विषय नहीं है। ये रिश्वतखोर ये काला बाजारी करने वाले लोग, धन को किसी दूसरे देश में तो नही ले जा रहे हैं। कहावत है, यदि वह मेरा बहनोई नहीं है तो वह किसी दूसरे का बहनोई है। सम्पत्ति तो यहीं रहती हैं। अतः मैं किंचित मात्र भी यह संकीर्ण दृष्टिकोण नहीं अपनाता कि विद्यमान सम्पत्ति कहां जाती है। मैं राष्ट्र की सोचता हूँ। इंग्लैण्ड में तथा अन्य स्वतंत्र देशों में पहले ही विद्यमान अल्प सम्पत्ति को विभाजित करने की बजाय नई सम्पत्ति का सृजन करने की ओर पूरा ध्यान दिया जाता है। अतः मैं इस बात का हृदय से समर्थन करता हूँ कि पैतृक सम्पत्ति में महिलाओं का भी हिस्सा होना चाहिये। उनका अपना हिस्सा होगा तो वे अपने धन के बारे में और अधिक सावधानी बरतेंगी। मेरा यह अनुभव रहा है कि महिला का व्यय पुरुष के व्यय से काफी अधिक होता है। मैंने देखा है कि जब लड़कियां कालेज तथा स्कूल जाती हैं तो माँ को लड़कों के कपड़ों की अपेक्षा लड़कियों के कपड़ों की अधिक चिन्ता होती हैं। युवा लड़के पूरा रास्ता पैदल चलकर स्कूल जा सकते हैं किन्तु युवा लड़कियों को या तो तांगे में या बस में बैठकर स्कूल जाना चाहिये, चाहे बस का खर्च प्रति महीना 15 रुपये ही क्यों न आये। अतः कपड़ों और परिवहन तथा अन्य चीजों के मामले में महिला की शिक्षा पर अधिक खर्च आता है। यह तो तब होता है जब वह विवाहित नहीं होती। जब महिलायें विवाहित होती हैं, तो आप उनके कपड़े और हमारे कपड़े देख सकते हैं। मैंने विवाहों में प्रायः देखा है कि लड़का मूर्ख दिखाई देता है और लड़की रानी दिखाई देती है। मैंने ऐसा देखा है और सभी व्यक्ति जो आलोचनात्मक दृष्टि से इसे देखते हैं, प्रमाणित करेंगे कि ऐसा ही होता है। मैंने आधुनिक महिलाओं और आधुनिक पुरुषों को एक साथ सड़क पर चलते भी देखा है। आधुनिक पुरुष सामान्यतया अंग्रेजी पोशाक पहनता है और हर व्यक्ति को अंग्रेजी पोशाक फबे यह जरूरी नहीं है। कुछ अपवाद हैं। हम में से अधिकांश को यह बड़ी बेढंगी लगती है। किन्तु महिला देसी साड़ी पहने हुए होती है जो रंग-बिरंगी होती है और उसने जेवर न पहने हुए हों तो भी