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यह एक ऐसा विधेयक है जिसमें पूरे देश की किसी अन्य विधेयक की अपेक्षा अधिक रुचि प्रतीत होती है। इस सदन के सदस्यों को इसके बारे में अपनी राय व्यक्त करने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। इस सदन के सभी सदस्यों को, वे चाहे इस प्रस्ताव के पक्ष में हो या इसके विरोध में हों, जो जनता के प्रतिनिधि के रूप में इस विधेयक पर अपने विचार व्यक्त करना चाहते हैं, हमें उन्हें समय देना चाहिये। यदि हम कल समय नहीं दे सकते तो सरकार को विधेयक पर चर्चा के लिए अन्य दिन देने चाहिये। मेरा निवेदन है कि यह इस देश की जनता के प्रति अथवा यहां उपस्थित सदस्यों के प्रति न्याय नहीं होगा कि किसी व्यक्ति को जो इस विधेयक पर विचार व्यक्त करना चाहता है, अपने विचार व्यक्त करने का अवसर न दिया जाये।
माननीय उपाध्यक्षः माननीय प्रधानमंत्री पहले कह चुके हैं कि वह इस विधेयक पर चर्चा के लिए और सरकारी दिन आवंटित करेंगे। बहुत-से अन्य विधेयक ऐसे हैं जो प्रवर समितियों को सौंपे गये हैं और कुछ ऐसे हैं जिनके बारे में प्रवर समिति के प्रतिवेदन सभा में पेश कर दिये गये हैं जिन के बारे में प्रवर समिति के प्रतिवेदन सभा में पेश कर दिये गये हैं। इन सब किये जाने वाले कार्य को ध्यान में रखते हुए माननीय प्रधानमंत्री का स्पष्ट विचार है कि हिंदू संहिता विधेयक के लिए एक दिन से अधिक समय नहीं दिया जा सकता। अतः जहां तक इस मामले का सम्बन्ध है, यह एक सरकारी दिन है और मैं पूरी तरह सरकार के हाथों में हूँ। यह सभा पर निर्भर है कि वह सहमत होती है अथवा नहीं। मुझे इस मामले में और कुछ नहीं कहना है। अभी तक करीब सत्ताईस सदस्य बोले चुके हैं और हमने सात दिन से अधिक और उन्नीस जमा पांच यानी चौबीस घंटे ले लिये हैं।
डॉ. पी.एस. देशमुखः कितने बोलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं?
मौलाना हसरत मोहानी (यू.पी.ः मुसलमान)ः इस बात की क्या गारंटी है कि हम कल चर्चा खत्म कर लेंगे?
माननीय उपाध्यक्षः अभी भी मेरे पास करीब चौंतीस नाम हैं जो बोलना चाहते हैं। यही स्थिति है और केवल कल का दिन इस काम के लिए सरकारी दिन के रूप में आबंटित किया गया है। यह अब सभा के लिए है कि वह कल इस पर विचार करे। अब, जहां तक शनिवार का सम्बन्ध है यह सरकारी दिन के रूप में रखा जायेगा क्योंकि कल का दिन इस पर लगेगा। आप प्रवर समिति की बैठक किसी अन्य दिन बुलाने की व्यवस्था कर सकते हैं।
अब सभा कल सुबह 10ः45 बजे तक के लिए स्थगित होगी।
तत्पश्चात् सभा बुधवार, 14 दिसम्बर, 1949 के पौने ग्यारह बजे तक के लिए स्थगित हुई।