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देता कि उन्हें अपनी ही चिन्ता होती है। यह तो पहनने वाला ही जानता है कि जूता कहां काटता है। वे जानती हैं कि उन्हें किन अड़चनों का सामना करना पड़ता है। मुझे खेद है कि बंगाल का एक सदस्य इस विधेयक का विरोध कर रहा है और वह यह नहीं जानते कि बंगाल में विधवाओं की क्या दशा है। मैंने उन्हें अपनी आंखों से देखा है।
श्री सुरेश चन्द्र मजूमदार (पश्चिम बंगालः सामान्य)ः पश्चिम बंगाल के सभी सदस्य नहीं।
आचार्य जे.बी. कृपलानीः मैं केवल एक सदस्य की बात कर रहा था जो बड़े जोश से विधेयक का विरोध कर रहे हैं। मैं कह रहा था कि पहनने वाला ही जानता है कि जूता कहां काटता है। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि महिलाओं को जो वह चाहती हैं मिल जाता है, तो भी घर के प्रति अपने घर के पुरुषों के प्रति उनका परम्परागत लगाव कम नहीं होगा और मुझे इसमें पूरा विश्वास है। महोदय, मैं ऐसी महिलाओं से जुड़ा हुआ हूँ जिनको आधुनिक समझा जा सकता है कि आप मुझे माफ करेंगे यदि मैं आपको अपने घरेलू जीवन की झलक देता हूँ। श्रीमती कृपलानी को आप जानते हैं और सभा भी जानते है लेकिन आप उनकी सार्वजनिक गतिविधियों के बारे में ही जानते हैं।
सारजेन्ट रोहिनी कुमार चौधरी (असमः सामान्य)ः मेरा एक व्यवस्था का प्रश्न है। महोदय, क्या आप श्रीमती कृपलानी के बारे में चर्चा कर सकते हैं, जो यहां इस सभा में उपस्थित नहीं हैं?
आचार्य जे.बी. कृपलानीः निस्संदेह, यदि कोई अन्य सदस्य उनके बारे में चर्चा करते हैं तो मुझे बड़ी आपत्ति होगी लेकिन मैंने सोचा कि मुझे उनके बारे में चर्चा करने का थोड़ा सा अधिकार है। जैसा कि मैं कह रहा था, वह सार्वजनिक जीवन में अपना पूरा हिस्सा लेती हैं किन्तु घर पहुंचने पर वह एक प्राचीन महिला की तरह एक अच्छी गृहिणी बन जाती है।
यद्यपि मैं नहीं चाहता कि कोई व्यक्ति मेरे लिए शारीरिक काम करे, मैं आपको बता सकता हूँ कि जब मैं देख नहीं रहा होता वह मेरी चप्पल साफ करने और मेरे कपड़े धोने जैसे सभी काम करती है। मुझे अन्य महिलाओं को भी, जो आधुनिक समझी जाती हैं, देखने का अवसर मिला है। मैं उन सदस्यों से भली-भांति परिचित हूँ जिनको आप केवल सभा में देखते हैं और मैंने उन्हें अपने घर के वातावरण में बच्चों के साथ देखा है, उनके पतियों के साथ उनके भाइयों के साथ देखा है और मैं बिना किसी हिचकिचाहट के कह सकता हूँ कि उनमें वे सभी सद्गुण हैं जो प्राचीन काल में महिलाओं में होते थे बल्कि अब उन्होंने अपने जीवन को समृद्ध बनाने के लिए सार्वजनिक कार्य करने का एक और सद्गुण प्राप्त कर लिया है। महादेय, मैं सिंध के एक समुदाय से सम्बन्ध रखता हूँ, जहां अधिकांश महिलायें शिक्षित हैं और आधुनिक विचारों के अनुसार उन्हें