(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 237

222 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री गोकुलभाई दौलतराम भट्टः मैं पांच या सात मिनट में खत्म करता हूँ। अगर आपकी इजाजत हो तो कुछ बातें और कह दूँ।

माननीय उपाध्यक्षः आपकी इच्छा है। पर तीस मिनट खत्म हो गये।

श्री गोकुलभाई दौलतराम भट्टः दो बातें करके मैं बहुत जल्दी से खत्म करता हूँ। मैं यह कहता हूँ, यह अकेला हिंदू समाज है कि आप जैसा भी घूसा मारो, वह चुपचाप सह लेगा। मुस्लिम समुदाय की ओर देखो। क्या किसी के पास हिम्मत है कि वह उनके लिए संहिता बनाये? शिया और सुन्नी विचारधाराओं को क्यों नहीं मिलाया जाता? क्या आप इसाइयों के कानून में हस्तक्षेप कर सकते हो? पारसियों के बारे में जरा हिम्मत कीजिये। यह बेचारा हिंदू समाज है जो सब कुछ सहन करता है, क्योंकि आप सोचते हैं यह मरा हुआ समाज है? अम्बेडकर साहब कहते हैं वे शूद्र जाति से संबंध रखते हैं। मैं कहता हूँ कि वे बहुत ऊंचे हैं। आपको कोई मुनि बता रहा है, कोई ऋषि बता रहा है, जबकि वे स्वयं कहते हैं कि वे शूद्र हैं, तो विश्वामित्र बन जाइये। आप जो कुछ हैं वह तो हैं ही, और बुद्धिमान भी हैं। तब निम्नता के भाव से क्यों देखते हैं? उन्होंने कहा कि स्मृतियां बदलती रहीं। ब्राह्मण लिखते रहे। वे कर भी क्या सकते थे? आपका विभाग क्या काम करता है? वही काम स्मृतिकारों का था। वह एक विभाग था जो समय-समय पर कायदे कानूनों को संशोधित करता रहा था। जिस तरह आप कानूनों में संशोधन कर पेश करते हैं, उसी तरह वह भी करते थे। पर इस प्रश्न में मैं ज्यादा नहीं जाना चाहता और न मैं दूसरी बातों में जाना चाहता हूँ। हमारी बहनें चाहती हैं कि यह मौलिक अधिकारों में आना चाहिए और जो लोग इसका विरोध करते हैं वे मौलिक अधिकारों पर विचार नहीं कर सकते। वे कहते हैं आप मौलिक अधिकारों को नहीं समझते? यह मौलिक अधिकार की शक्ल ले रहा है या राज्य का कानून? क्या िंहदू संहिता, राज्य कानून बनने जा रहा है या व्यक्तिगत या निजी कानून? अगर आप भारतीय संहिता का विधेयक लाते तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि कोई भी इसका विरोध नहीं करता लेकिन आप हिंदू संहिता विधेयक बना रहे हो और हिंदू लॉ में तबदीली कर रहे हो। परन्तु वैयक्ति कानून राज्य कानून नहीं है और इसलिए यह लागू नहीं होता। श्री गौड़ ने कहा था कि जब कोई फ्अवतारय् होगा तब इस संहिता को लायेगा। गौड़ साहब शायद नागपुर में बैठे होंगे और अब उनको यह सुन कर तसल्ली हुई होगी कि फ्अवतारय् का प्रादुर्भाव हो गया है और हिंदू संहिता विधेयक आ गया है।

श्री महावीर त्यागीः घृणित व्यक्ति!

श्री गोकुलभाई दौलतराम भट्टः मैं दो चार मिनटों में और अपनी बात कह कर

खत्म करना चाहता हूँ। कहा जाता है कि बहनों और भाइयों के साथ बर्ताव एक-सा करना चाहिये। कृपलानी जी तो चले गये, दूसरे क्या कहते हैं उन्हें क्यों सुनना चाहिए?