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के विरुद्ध नहीं हैं। वे चाहते हैं कि तर्कसम्मत परिणाम में महिलाओं को यह अधिकार दिया जाना चाहिये कि ऐसी सभी महिलायें जिनकी सीमित सम्पत्ति है। वह चाहते हैं कि तत्काल सम्पत्ति की पूर्ण स्वामिनी बन जाएं। मैं सोचता हूँ, मैं सही कह रहा हूँ?
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः मुझे उत्तर देने की अनुमति नहीं है।
माननीय उपाध्यक्षः माननीय सदस्य पंडित भार्गव अपनी बात जारी रखें।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः श्रीमान, इस कारण से मैं यह निवेदन कर रहा था कि प्रवर समिति के कई सदस्यों ने इस विधेयक के प्रारूप पर अपनी असहमति की टिप्पणी लिखी है। जैसा यह विधेयक प्रवर समिति से आया है। इसी पर कौन-से इरादे से ये असहमति की टिप्पणियां लिखी गई थीं। मैं बाद में निवेदन करूंगा, परन्तु मैं चाहता हूँ कि मेरे भाषण के बीच में टोकाटाकी न की जाए।
श्रीमान, मैं यह निवेदन कर रहा था कि यद्यपि यह विधेयक एक सीमा तक जाता है और मैं इससे भी परे जाने को तैयार हूँ, पर जहां तक सामाजिक सुधारों की बात है परन्तु फिर भी मैं अपने को ऐसी स्थिति में नहीं पाता हूँ कि इस विधेयक का पूर्णतया समर्थन करूं। और यह बात बिल्कुल स्वाभाविक है। यहां तक कि डॉ. अम्बेडकर स्वयं, जिनकी कृपा से इस विधेयक ने यह रूप लिया है और जिन्होंने ऐसा भाषण दिया है कि जिसके लिए प्रत्येक भारतीय और विशेषकर हिंदू को गौरवान्वित महसूस करना चाहिये, इस विधेयक के सभी उपबंधों का समर्थन नहीं करते। उसके बाद उन्होंने बताया है कि प्रवर समिति जगह-जगह तर्कसंगतता के बाहर गई है। मैं अधिक कठोर शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहता, परन्तु मैं यह कहूँगा कि वे भी इस विधेयक के विरुद्ध हैं और इस प्रकार असहमति के लिए 12 टिप्पणियां हैं। इसीलिए मैं यह निवेदन कर रहा था कि इन 17 सदस्यों में से 12 सदस्य इस विधेयक के विरोध में हैं। तब ऐसी परिस्थिति में सदन को आश्चर्य प्रकट नहीं करना चाहिये, यदि मैं श्री नजीरुद्दीन अहमद द्वारा प्रस्तुत संशोधन का समर्थन करूं कारण स्पष्ट है। मैं यह नहीं चाहता कि आप में से कोई व्यक्ति मुझे गलत समझे। इस विधेयक में ऐसी कई धारायें हैं, जिनके बारे में मैं नहीं चाहता उनके पारित किये जाने में एक मिनट का भी विलम्ब हो। यदि यह प्रस्ताव विलम्बकारी होता, तो मैं माननीय सदस्य का समर्थन नहीं करता। मेरे कई प्रस्ताव भी विलम्बकारी नहीं थे। मैं यह जानता हूँ कि यह विधेयक इस विधानसभा में अर्थात् विधानसभा के इस सत्र में पारित नहीं हो रहा है। इस विधेयक को पारित करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना होगा। अगल सत्र लगभग छः महीने बाद आरंभ हो पायेगा। अतः मैं जो आपत्ति उठा रहा हूँ, उसका निर्णय छः महीने की अवधि में आसानी से हो सकता है। श्रीमान, आपकी अनुमति से मैं यह निवेदन करना चाहूँगा कि मैं यह नहीं चाहता कि यह विधेयक दुबारा प्रवर समिति के समक्ष जाये और मेरे इस प्रस्ताव के कारण, नितान्त भिन्न हैं। शायद कुछ मान्य सदस्य यह विचार कर