(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 241

226 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इसके बाद, आप किसी ऐसी चीज की कद्र करना नहीं चाहेंगे। वह इस तरह के विवाद में नहीं जाना चाहेंगे जैसे कि तलाक की समस्या ने पैदा की है। एक पुरुष और एक स्त्री पंचायत में बैठकर यह कहते हैं कि हम एक दूसरे से छुटकारा पाना चाहते हैं। वह कहते हैं कि हमने संसार का सुख भोग लिया है और अब दूसरी जगह जाना चाहते हैं। वह इस झमेले में नहीं पड़ेंगे कि वह जिला न्यायालय या उच्च न्यायालय में इसके लिये जायें। अगर वह इस तरह से करेंगे तो मामला उल्टा हो जायेगा।

जब मैं गांव में जाऊंगा तो मैं लोगों से कहूंगा कि हिंदू संहिता विधेयक इस तरह से तैयार किया है और उसमें इस तरह के प्रावधान हैं तब वे लोग कहेंगे कि हम ऐसा नहीं चाहते हैं। हमारे गांवों में जो पंचायतें हैं, वे ठीक और उन्हें अनुमति होनी चाहिए कि वह जिस तरह से वर्तमान में चल रही है, वैसी ही चलती रहें। वे खुद को इस तरह के कायदे-कानूनों के झमेलो में नहीं पड़ने देना चाहते, जिससे वकीलों की बन आए और गरीब ज्यादा गरीब हो जाए। आपकी मेहरबानी से यह सब बातें पर्याप्त रूप से हिंदू कानून में हैं।

महोदय, मैं अजऱ् कर रहा था कि इन सब बातों का निचोड़ क्या होने वाला है। हर एक विषय पर मैं यहां बात नहीं कह सकता, क्योंकि मेरे पास इतना समय पर्याप्त नहीं है कि मैं इन सब बातों को बतलाऊं क्योंकि और भी मेरे बहुत से भाई इस पर बोलने वाले हैं।

तो महोदय, मैं यह कहने जा रहा था कि यह एक बड़े महत्व का सवाल है। यहां पर जिन भाइयों ने इसके बारे में अपना मत दिया है कि यह पारित किया जाना चाहिये तो मैं उनसे प्रार्थना करूंगा कि वह इस बात को अच्छी तरह पर सोच-विचार लें। यह जल्दबाजी से काम करने का समय नहीं है। जनता के सामने आप लोगों को जवाब देना होगा। मैं बहुत अदब से अपने माननीय नेता पण्डित जवाहरलाल जी से भी प्रार्थना करना चाहता हूँ कि यह प्रश्न जो हमारे सामने आया है, वह इतने महत्व का है, इतना मौलिक महत्व का है कि उस पर अच्छी तरह गौर करना बहुत आवश्यक है। इस पर सब लोगों की राय ली जानी भी बहुत आवश्यक है। श्रीमती रेणुका रे मेरी आदरणीय बहन ने जनमत के बारे में कहा था। इस तारतम्य में मैं यह कहना चाहता हूँ कि जल्द ही चुनाव होने वाले हैं, उस समय आप इस पर जनता के सामने यह रख सकते हैं कि हम इस तरह का हिंदू संहिता विधेयक ला रहे हैं वह आपको पसंद है या नहीं। आप उस समय जनता का मत प्रकाश में ला सकते हैं कि क्या वे संहिता चाहते हैं अथवा नहीं। अगर इस पर आपको मत मिल जाये तो आप खुशी के साथ इसको यहां पर पारित कर सकते हैं। यह जनमत के आधार पर स्वीकार किया जाना चाहिए। मैं अखबारों की बातों पर जानेवाला आदमी नहीं हूँ। अखबार वाले तो अपने अखबार को चलाने के लिये, बढ़ा-चढ़ा कर लिखा करते हैं। मुझे अखबार वालों से कोई द्वेष नहीं है। मैं उनके साथ सहानुभूति रखता हूँ और मेरी उनसे हमदर्दी है। लेकिन जहां तक जनमत लेने का सवाल है, मैं अपनी बहन श्रीमती रेणुका रे से जो इस समय यहाँ पर मौजूद नहीं हैं तथा दूसरी बहनों से भी यह