(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 242

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कहना चाहता हूँ कि चन्द महीनों के बाद चुनाव होने वाला है, उस समय वे जनता के सामने अपना प्रश्न रख सकती हैं। आप जनता से यह कह सकती हैं कि हमने इस तरह से हिंदू संहिता विधेयक रखा है और पास कराना चाहते हैं। अगर जनता ने आपको इस बारे में मत दे दिया, तो हम अवश्य इसको यहां पर पास कर सकते हैं।

तो मैं सरकार से प्रार्थना करना चाहता हूँ कि वह इस बात पर विचार करे और इस समय इसको पारित न करे। अन्त में मैं यही कहूंगाः फ्न बायीं तरफ जाएं, न दायीं तरफ जाएं, निष्कर्ष निकालने के लिए, बीच का रास्ता अपनाएं।य्

श्री आर.के. सिधवा (मध्य प्रांत और बरारः सामान्य)ः महोदय, मेरे मित्र ने पारसी विवाह अधिनियम का उल्लेख किया है। क्या आप मुझे स्थिति स्पष्ट करने के लिए पांच मिनट का समय देंगे?

माननीय उपाध्यक्षः मैं कोई समय नहीं दे रहा हूँ, क्योंकि उन्होंने किसी तरह इसकी आलोचना नहीं की है। उन्होंने कहा कि पारसी विवाह विधेयक विश्व के सभी लोगों को भेजा गया था। उन्होंने इसका प्रयोग इस विधेयक के मामले में एक तर्क के रूप में किया था जिसका सम्बन्ध 40 करोड़ लोगों से है। अतः इस आधार पर माननीय सदस्य बोलने के अधिकार की मांग नहीं कर सकते।

श्री आर.के. सिधवाः नहीं, महोदय, उन्होंने गलत बयान दिया है।

माननीय उपाध्यक्षः तो माननीय सदस्य को यह बात मेरी जानकारी में लानी चाहिये थी। हम हर मामले में तर्क दुबारा शुरू नहीं कर सकते।

श्री आर.के. सिधवाः क्या मुझे इस विधेयक पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है?

माननीय उपाध्यक्षः प्रत्येक सदस्य को बोलने का अधिकार है, इसमें मुझे कोई संदेह नहीं है। पर समय इजाजत नहीं देता है।

ऽडॉ. बख्शी टेक चन्द (पूर्वी पंजाबः सामान्य)ः महोदय, इस विधेयक पर कई दिन चर्चा चली है। प्रश्न के दोनों पहलू आपके समक्ष रखे गये हैं। एक पक्ष ने या दूसरे पक्ष ने जो तर्क दिये हैं मैं उनकी पुनरावृत्ति नहीं करना चाहता। मैं केवल दो बातें कहना चाहता हूँ, एक विधेयक के समर्थकों से और एक विधेयक का विरोध करने वालों से और उसके बाद मैं ऐसे परिवर्तनों के लिए सभा के विचारार्थ एक सुझाव दूंगा, जो मैं समझता हूँ विधेयक को सभी को या सभा तथा देश के अधिकांश लोगों को स्वीकार्य बनाने के लिए विधेयक में रखा जाना चाहिए। अतः मैं इस सभा से अनुरोध करूंगा कि मुझे सभा के समक्ष अपने विचार रखने के लिए कुछ मिनट देने की कृपा करें।

ऽसंविधान सभा (विधायी) डी., खंड 6, भाग II, 14 दिसम्बर, 1949, पृष्ठ 585-99