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एक व्यक्ति की अचल सम्पत्ति किसी नगर में होती, तो उसकी उस शहरी सम्पत्ति चल सम्पत्ति पर एक कानून अर्थात् डॉ. अम्बेडकर के न्यायालय का कानून लागू होता, किंतु कोई तीन मील दूर स्थित कृषि भूमि पर पुराना कानून लागू होता। बेटों को उनके जन्म के समय से ही सभी अधिकार प्राप्त होते और उत्तरजीविता का नियम बना रहता और किसी को यह जानकारी नहीं होती कि सम्पत्ति के बारे में क्या स्थिति है। देखिये, आप कितने बचाव के रास्ते छोड़ रहे हैं? यदि आप अपनी बेटी को सम्पत्ति नहीं देना चाहते, तो आप उसका हिस्सा पूना में बेच सकते हैं और पांच मील पीछे कृषि भूमि खरीद सकते हैं और इस प्रकार अपनी बेटी को अपने हिस्से से वंचित कर सकते हैं और इस तरह विधेयक के प्रावधान निष्प्रभावी कर सकते हैं। किन्तु अभी सौभाग्य से क्या हुआ है? आज जब हम इस विधेयक के दूसरे पाठन के इस प्रथम भाग के अन्त में हैं, स्थिति यह है कि डॉ. अम्बेडकर और प्रारूप समिति का सुझाव संविधान सभा ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है और ईश्वर ने चाहा तो यह 26 जनवरी को लागू हो जाएगा जो इस विधेयक के तीसरे पाठन से काफी पहले आ जाएगी। मैंने एक दिन उनसे पूछा भी कि क्या वह अब यह परिवर्तन करेंगे ताकि विधेयक का यह विशेष खंड, जिसमें कृषि भूमि शामिल नहीं की गई है, हटाया जा सके, जिससे हम एक चौथाई या आधा या पूरा हिस्सा दे सकें या कोई हिस्सा न दें, तो उन्होंने कहाµफ्नहीं।य्
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं नहीं समझता कि माननीय सदस्य को किसी बातचीत का ब्यौरा देने का अधिकार है। मैंने केवल यह कहा था कि इस समय मेरा यह विचार है, बाद में हम स्थिति पर पुनर्विचार भी कर सकते हैं। अब चूंकि हमारे पास सत्ता है, हमारे रास्ते की एक बाधा दूर हो गई है।
डॉ. बख्शी टेक चन्दः मुझे बड़ी प्रसन्नता है कि मेरे विद्वान मित्र ने मेरी भूल में सुधार कर दिया है। इस भूल-सुधार के लिए मैं उनका बड़ा आभारी हूँ कि इस समय उनका इरादा इस खंड को रद्द करने का नहीं है। अपितु अभी वह इसे बनाये रखना चाहते हैं, लेकिन बाद मेंख्...,
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैंने ऐसी कोई बात बिल्कुल नहीं कही है। मैं नहीं समझता कि मेरे मित्र को मेरी बातचीत का प्रयोग करने का अधिकार है।
डॉ. बख्शी टेक चन्दः वह बातचीत नहीं, किन्तु आपने अब इस सभा में जो कहा है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ये ऐसे मामले हैं, जिनके बारे में मैं अकेला निर्णय नहीं ले सकता। मुझे अपने सहयोगियों की मंजूरी लेनी होगी।
माननीय उपाध्यक्षः माननीय सदस्य प्रस्तुत विधेयक पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कह सकते हैं कि विद्यमान रूप में विधेयक में कृषि भूमि के बारे में कोई प्रावधान नहीं है। उन्हें निजी बातचीत का हवाला देने की आवश्यकता नहीं है।