(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 253

238 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. बख्शी टेक चन्दः विधेयक को वर्तमान रूप में लीजिये। परिवर्तन अब किया जायेगा या बाद में मंत्रिमंडल अथवा अन्य दलों की सहमति से किया जायेगा, यह एक अलग मामला है। लेकिन अब क्या स्थिति है? कृषि भूमि शामिल नहीं की जा रही है। देश के किसी भाग में हिंदुओं की 80 प्रतिशत से अधिक सम्पत्ति भूमि के रूप में है। इस प्रकार इस विधेयक के अन्तर्गत हमारी बहन, बेटियों और अन्य महिला सम्बन्धियों की सम्पत्ति के बहुत बड़े भाग पर उत्तराधिकार से वंचित रखा जा रहा है। इस कारण यह भी आवश्यक है कि विधेयक पर पुनः विचार किया जाये और वर्तमान रूप में इस पर आगे विचार न किया जाये। आप जो भी कानून बनायें आप को उसे सभी सम्पत्ति कृषि, शहरी, चल अथवा अचल पर लागू करना चाहिये।

पंडित बालकृष्ण शर्मा (संयुक्त प्रांतः सामान्य)ः यदि मेरे माननीय मित्र मुझे एक मिनट के लिए अवसर दें तो मैं जानना चाहूंगा कि यह कानून कृषि भूमि पर लागू किया जाये तो क्या इससे भूमि का विभाजन नहीं होगा। (व्यवधान)

माननीय उपाध्यक्षः कोई व्यवधान नहीं होना चाहिये। चर्चा किसी समय भी बन्द हो सकती है और मैं सभा को पहले ही चेतावनी दे चुका हूँ। व्यवधान जितना कम होगा, उतने ही अधिक सदस्यों को वाद-विवाद में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

डॉ. बख्शी टेक चन्दः जहां तक भूमि के विभाजन का सम्बन्ध है, मुझे इससे कोई डर नहीं है। वासियों की संख्या अधिक होगी तो यह होना स्वाभाविक है। यदि किसी व्यक्ति के पांच बेटे हैं तो भूमि का विभाजन जरूर होगा और यदि उसकी तीन बेटियां भी हैं तो भूमि का और अधिक विभाजन होगा। अचल सम्पत्ति हो या शहरी सम्पत्ति हो, मुझे सम्पत्ति के विभाजन से कोई डर नहीं है। यदि आपके एक या दो मकान हैं और दो बेटे तथा पांच बेटियां हैं और वे सम्पत्ति का विभाजन करने का निर्णय लेते हैं, जो सम्पत्ति का विभाजन अवश्यभावी है। अतः दोनों पक्षों के लिए यह तर्क असंगत है और इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाना चाहिये।

इस विधेयक के अन्तर्गत 80 प्रतिशत से अधिक सम्पत्ति को इसके उपबन्धों के प्रभाव से मुक्त रखा गया है। सुधार की दृष्टि से यह एक बड़ी कमी है।

इस विधेयक के सम्बन्ध में एक आपत्ति यह भी उठायी गयी है। किसी व्यक्ति के पास एक मकान और थोड़ी-बहुत जमीन भी हो सकती है। कुछ ग्रामीण लोगों के पास कोई कच्ची दुकान भी हो सकती है। उसमें अनेक विभाजन होंगे और परिवार में दामाद का भी प्रवेश होगा। इस विधेयक के कुछ समर्थकों का कहना है कि यह उचित आपत्ति है और इसलिये हमें तीसरे वाचन में इस आशयका एक खंड इसमें जोड़ देना चाहिए जिससे परिवार के रिहायशी मकान को उत्तराधिकार के उपबंधों से अलग रखा जायेगा। कहने का अभिप्राय यह है कि यद्यपि लड़की भी उत्तराधिकारी रहेगी पर रिहायशी मकान