(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 259

244 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कुछ भाई ऐसा करते हैं। परन्तु हम अनेक मामले जानते हैं, जिनमें भाई और विशेषकर उसकी धर्मपत्नी सब कुछ खींच लेती है और वे बहिन के दहेज के लिये बहुत कम छोड़ते हैं। विशेषरूप से यह स्थिति तब पैदा होती है, जब वह किसी ऐसे परिवार में जाती है जो अधिक समृद्ध नहीं होता और गांव में उसका अधिक प्रभाव भी नहीं होता। अतः हमें इसके लिये व्यवस्था करनी चाहिए। मैं कहना चाहूंगा कि इसके लिये शास्त्रों में भी सशक्त व्यवस्था है। कुछ में लिखा है कि उसका हिस्सा एक-चौथाई होना चाहिए और कुछ का कहना है कि वह बराबर का होना चाहिए और कुछ आधे के पक्ष में हैं। मैं आधे हिस्से के पक्ष में नहीं हूँ। मुसलमानों के कानून के हिसाब से उसको पूरा हिस्सा मिलना चाहिए।

श्री बी.एल. सोंधी (पूर्वी पंजाबः सामान्य)ः अविवाहित बेटी का सम्पत्ति पर अधिकार कब तक बना रहेगा?

डॉ. बख्शी टेक चन्दः एक बार जब सम्पति का अधिकार दे दिया जाता है तो उसको निरस्त करने का प्रश्न ही नहीं होता। आखिरकार इससे परिवार में समस्याएं भी पैदा नहीं होगी। हमें कुछ ऐसी व्यवस्था अवश्य करनी चाहिए_ पर हम सुनिश्चित करेंगे कि बाद में कुछ समायोजन भी हो जायें।

मैं अब विवाह सम्बन्धी अध्याय और तलाक सम्बन्धी अध्याय के बारे में भी कुछ कहना चाहूंगा। विधेयक के इस भाग के बारे में मेरी एक साधारण-सी आपत्ति है। पहला अध्याय एक पत्नी विवाह के बारे में है, मैं इस व्यवस्था का तहेदिल से समर्थक हूँ कि प्रत्येक हिंदू को केवल एक बार, न कि अधिक बार विवाह करना चाहिए। हम में से अधिकांश लोग एकसा ही करते हैं।

श्री एच.वी. कामतः केवल एक बार या बिल्कुल नहीं।

डॉ. बख्शी टेक चन्दः बेटा पैदा न होने संबंधी सभी तर्क निरर्थक हैं। इस बात की क्या गारंटी है कि आप, एक के बाद एक, तीन पत्नियों से विवाह करें, तो उनमें से किसी से बेटा ही पैदा होगा? यह तो संयोग की बात होती है। इसलिये कम से कम मैं इस तर्क से सहमत नहीं हूँ। वास्तव में, और व्यवहार में भी अधिकांश हिंदुओं की एक ही पत्नी होती है और इस उपबन्ध को इस विधेयक में शामिल न करने का मैं कोई कारण नहीं समझता।

श्री लक्ष्मी नारायण साहूः उत्कल में तीन लाख महिलाएं पुरुषों से अधिक हैं। यदि आप एक के लिये केवल एक की बात करेंगे तो आप 3 लाख अतिरिक्त महिलाओं के लिये कैसे व्यवस्था करेंगे?

डॉ. बख्शी टेक चन्दः इस में भी फिर धर्म आड़े आने लगा है। बड़ौदा में, वर्ष