(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 260

245

1931 में ‘मोनोगेमी एण्ड डाइवोर्स बिल’ है। (एक पत्नी का विवाह और विवाह-विच्छेद विधेयक) एक ऐसे विधानमंडल द्वारा पारित किया गया था, जिसके 95 प्रतिशत सदस्य हिंदू थे। यह कार्रवाई एक महाराजा के संरक्षण में हुई जो एक रूढि़वादी हिंदू थे। उपर्युक्त विधेयक उन्नीस वर्षों तक लागू रहा। क्या हम कह सकते हैं कि इस विधेयक के कारण बड़ौदा में हिंदू धर्म समाप्त हो गया है? बम्बई में श्रीमती मुंशी का विधेयक 1946 में पारित किया गया और वहाँ के विधान का अंग बना। गत वर्ष मद्रास में मद्रास विधानमंडल ने इसी प्रकार का विधेयक पारित किया था। इस प्रकार हम देखते हैं कि लगभग समस्त दक्षिण भारत में एक पत्नीत्व विधि प्रचलित है। वहां हिंदू धर्म नष्ट नहीं हुआ है। हमारे मद्रासी मित्र हमेशा मजबूत रहे हैं। इसलिये मैं समझता हूँ कि यह उपलबंध बहुत उपयोगी है और इसे बनाये रखना चाहिए।

श्री गोकुलभाई दौलतराम भट्टः महोदय, यदि आप अनुमति दें तो जानकारी के लिये मैं एक या दो प्रश्न पूछना चाहूंगा।

माननीय उपाध्यक्षः वह नहीं मानेंगे।

श्री गोकुलभाई दौलतराम भट्टः आपने एक-पत्नी विवाह के बारे में जो कुछ कहा है, वह बिल्कुल ठीक है, परन्तु मैं यह पूछना चाहता हूँ कि क्या कोई व्यक्ति अपनी पहली पत्नी के जीवित रहते उसकी रजामंदी के साथ, दुबारा विवाह कर सकता है?

डॉ. बख्शी टेक चन्दः मुझे बहुत प्रसन्नता है कि हमारे माननीय भाई गोकुलभाई जी ने यह प्रश्न पूछा है। इस बारे में मुझे यह कहना है कि आप जैसे चाहो, महिला की अनुमति प्राप्त कर सकते हो। मुझे ऐसे बहुत से मामलों की जानकारी है। एक मामले में एक वृद्ध पुरुष था और एक वृद्धा महिला थी। एक बहुत विद्वान पंडित, ज्योतिषी को बुलाया गया और सब प्रकार की पूजा आदि करवा लेने के बाद, उसने महिला से कहा फ्आपके पति का आगामी तीन महीनों में देहान्त होने वाला है, और इस समस्या का समाधान एक ही है कि उसका दूसरा विवाह हो जाये और यदि उसका विवाह हो जाता है तो उसका पुत्र पैदा होगा।य् और कुछ ऐसी ही बातें कहीं। उस महिला ने, यह सोचकर कि अब भारी विपत्ति आने वाली है, अपनी रजामंदी दे दी। अब निःसंदेह उस घर में एक नहीं बल्कि पांच महिलाएं हैं। (व्यवधान)

माननीय उपाध्यक्षः कृपया शान्ति बनाये रखें। माननीय सदस्य पिछले आधे घंटे से बैठने का प्रयत्न कर रहे हैं, परन्तु बार-बार प्रश्न पूछे जाने के कारण वे बोलते जा रहे हैं।

डॉ. बख्शी टेक चन्दः मैं अन्तिम बात पर आता हूँ, जो तलाक के बारे में है। इस विधेयक में जो सबसे बड़ी गलती की गयी है वह यह है कि सांस्कारिक विधि से किये गये विवाह के विघटन सम्बन्धी उपबंधों के समाज ही सिविल विवाहों के विघटन संबंधी उपबंध रखे गए हैं। इस सम्बन्ध में प्रवर समिति द्वारा अब प्रस्तुत विधेयक,