हिंदू विवाह वैधता विधेयक - Page 26

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कहना चाहता हूँ कि आगामी छः महीने में आसान टूट कर हमारे सिर पर नहीं गिर पड़ेगा कि हम इस विधेयक को शीघ्रता छोड़ तत्काल पारित करें। इसलिए मैं अति विनम्र भाव से यह कहना चाहूँगा जैसे कि श्रीमान, आपने अपनी असहमति की टिप्पणी में लिखा हैः कि इन बारह व्यक्तियों में, जो 12 राशियों के संकेत हैं, उनमें से एक आप भी हैं। और आपके साथ ही बाबू रामनारायण सिंह ने भी पृष्ठ 11 पर अंकित किया हैःµ

फ्सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित किये गये हैं और उन्हें मतदाताओं से जनादेश प्राप्त नहीं है। अधिकांश अभिमत और सदस्यों का बहुमत इस विधेयक के अधिकांश उपबंधों के विरुद्ध हैं और यह विधेयक हिंदू समाज की सैद्धान्तिक संरचना को बदलता है।य्

अतः मैं अति विनम्र भाव से यह निवेदन करता हूँ कि न्याय की मांग यही है कि इस विधानसभा में निर्वाचित होने के बाद प्रत्यक्ष चुनाव के प्रतिनिधियों को इस विषय में निर्णय करने का अवसर प्रदान किया जाना चाहिये। हमारे सम्मानित और देश के सच्चे नेता डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने इस सिद्धांत से सहमत होते हुए एक पत्र लिखा था कि यह विधेयक सम्पूर्ण रूप से आगामी प्रतिनिधित्व करने वाली विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाये।

श्री तजामुल हुसेनः वह विषय क्या था, जिसके बारे में वायसराय ने लिखा है?

पंडित ठाकुर दास भार्गवः श्रीमान, आप जो कुछ गवर्नर जनरल के बारे में कहते हैं, यहां उल्लेख किया जा चुका है। परन्तु मैं अति विनम्र भाव से यह कहता हूँ कि मैं ज्येष्ठ व्यक्तियों के अभिमत का अधिक आदर करता हूँ। आज इस विषय का मुझसे जो सम्बन्ध है और उस प्रत्येक महिला से, जो सुदूर गांव में रहती है संबंध है। प्रत्येक व्यक्ति इस विधेयक से प्रभावित होगा, अतः प्रत्येक व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह इसके बारे में अपना मत प्रकट करे। मैं सहमत क्यों नहीं हूँ, यह है कि कल ही मेरी माननीय बहन श्रीमती सुचेता कृपलानी ने कहा था कि इस प्रकार से तो सदियां बीत जाएंगी। यह विधेयक पिछले दस वर्षों से विचाराधीन है क्योंकि इस विधेयक का मसौदा सन् 1941 में तैयार किया गया था। मुझे यह तर्क अपील नहीं करता। क्या मैं यह पूछ सकता हूँ कि इस देश में कितनी साक्षरता है? क्या मैं यह जान सकता हूँ कि इस देश में कितनी महिला साक्षर हैं? मैं अपनी माननीय बहन को सम्बोधित कर चाहता हूँ कि इस सदन के सदस्य कौन हैं और मैं किन सदस्यों के मत का अधिक आदर करता हूँ, परन्तु मैं यह कहना चाहूँगा कि क्या उनकी हजारों बहनें जो गांवों और नगरों में रहती है, उनके पास इस विषय में अपना मत अभिव्यक्त करने का अधिकार है? यही कारण है मैं अपनी माननीय बहनों से आग्रहपूर्वक कहना चाहूँगा कि उन्हें इस विषय में धैर्य रखना चाहिए और कुछ संयम का परिचय देना चाहिए। मेरा अभिप्राय था कि उन लोगों के अभिमत को भी सम्मिलित किया जाए जिन्हें अपने मत को अभिव्यक्त करने का पूरा अधिकार है, तो इसे एक अपराध नहीं समझा जा सकता। अति विनम्र भाव से मैं यह निवेदन करना चाहता हूँ कि जो लोग नगरों और गांवों में रहते हैं, वे अवगत नहीं हैं