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रीति अनुसार किये गये विवाहों के सम्बन्ध में ही लागू की जानी चाहिए। मेरा निवेदन यह है कि जैसा कि मैंने अपनी असहमति वाली टिप्पणी में कहा है कि विवाह और तलाक सम्बन्धी अध्याय को फिर से लिखा जाना चाहिए। हिंदू दो ढंग से विवाह करते हैंµसिविल और सांस्कृतिक। एक के मामले में आपको पता होता है कि किन शर्तों के अन्तर्गत उसका विघटन किया जा सकता है। दूसरे मामले में भी आपके नये आधुनिक विचार हो सकते हैं। मैं इस विधेयक के समर्थक सदस्यों से कहना चाहता हूँ कि वे इस मामले पर गम्भीरतापूर्वक विचार करें कि क्या इससे महिलाओं की स्थिति में सुधार होगा। यदि मेरे सुझाव को स्वीकार कर लिया जाता है तो प्रस्तुत विधेयक बहुत अच्छा बन जायेगा और महिलाओं के अस्तित्व को पूरा सम्मान मिलेगा। उनको सम्पत्ति का पूरा अधिकार मिलेगा, आर्थिक दृष्टि से भी वे आत्मनिर्भर महसूस करेगी। नये संविधान के अन्तर्गत वयस्क मताधिकार की व्यवस्था है। हमारे यहाँ, प्रशासन के विभिन्न विभागों का प्रभार कई महिला मंत्रियों के अधीन है। हम महिला के अधिकार को सीमित नहीं कर सकते, उसको गृहिणी मात्र नहीं रहने दे सकते और इस प्रकार उसको अन्य अधिकारों से वंचित नहीं रख सकते। यह उसके साथ घोर अन्याय होगा। ऐसा करना हमारे प्राचीन विधान के विपरीत होगा। इस बीच कुछ समय के लिए जो जोर-जबरदस्ती हुई, वह किसी परिस्थिति विशेष में उचित समझी गयी होगी, शायद उस युग की परिस्थितियां कुछ ऐसी रही होंगी। परन्तु अब वे सब निरर्थक हो चुकी हैं। वे हिंदू धर्म से सम्बन्धित नहीं है और उनको समाप्त कर देना चाहिए। हमें उन निरर्थक बातों का परित्याग कर वैदिक संकल्पनाओं को अपनाना चाहिए।
संक्षेप में मेरा इतना ही निवेदन है और मैं चाहता हूं प्रत्येक माननीय सदस्य को मेरे सुझावों पर गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए।
माननीय श्री के. संथानम (परिवहन एवं रेल राज्य मंत्री)ः स्पष्टीकरण की
खातिर क्या मैं एक प्रश्न पूछ सकता हूँ? कल्पना कीजिए की कोई महिला अपने पति की सम्पत्ति के सहसमांशी बन जाती है, तो क्या उसका हिस्सा उसके पति के हिस्से का ही भाग होगा या वह अलग होगा?
डॉ. बख्शी टेक चन्दः जब तक वे संयुक्त परिवार के रूप में साथ रहते हैं। पूरे परिवार का संयुक्त स्वामित्व रहेगा जैसा कि आप और आपके बेटे सम्पत्ति में सहसमांशी हैं। परन्तु यदि विभाजन हो जाता है, तब वह स्वतंत्र हो जायेगी। यह सीधी-सी बात है कि सम्पत्ति में तब उसका भी हिस्सा होगा जैसे कि बेटे का होता है।
एक माननीय सदस्यः महोदय, अब प्रश्न के मतदान के लिये रखा जाये।
कुछ माननीय सदस्यः नहीं, नहीं।
मौलाना हसरत मोहानी (यू.पी. मुस्लिम)ः मैं केवल पांच मिनट लूंगा।