(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 263

248 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कुछ माननीय सदस्यः उठ खड़े हुए।

माननीय उपाध्यक्षः कृपया शान्ति बनाए रखें। क्या सभी सदस्य अपने-अपने स्थान पर बैठ जायेंगे? मैं देख रहा हूँ कि काफी बड़ी संख्या में सदस्य इस विषय पर बोलना चाहते हैं, परन्तु जैसा कि मैंने कल कहा था, यदि हम इस हिसाब से चलते रहे तो हमारे एक महीने या दो महीने तक बैठे रहने पर भी समय का अभाव ही रहेगा। माननीय सदस्य अपने भाषणों को संक्षिप्त नहीं करना चाहते। हिंदू संहिता केवल हिंदुओं पर ही लागू नहीं होती, बल्कि विवाह के ये नियम और रस्में, जैनियों और सिक्खों पर भी लागू होती हैं। यह मुसलमानों, ईसाईयों और पारसियों पर लागू नहीं होती। (व्यवधान)

एक माननीय सदस्यः इस विधेयक के कुछ खंड अन्य समुदायों पर भी लागू होते हैं।

माननीय उपाध्यक्षः माननीय सदस्य भली-भांति जानते हैं कि जब अध्यक्ष महोदय

खड़े हों, तो किसी अन्य सदस्य को उठना नहीं चाहिए। यह बात माननीय सदस्यों को स्मरण कराने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। इसलिये अब मैं जैन समुदाय के एक सदस्य को और सिख समुदाय के एक सदस्य को बुलाऊँगा और फिर अन्य सदस्यों को। प्रो. के.टी. शाह।

श्री एच.के. खांडेकर (सी.पी. एण्ड बिरारः सामान्य)ः हरिजनों को क्यों नहीं।

मौलाना हसरत मोहानीः उठ खड़े हुए।

माननीय उपाध्यक्षः अभी मैं इस माननीय सदस्य को अनुमति नहीं दे रहा, पहले अन्य माननीय सदस्यों से चर्चा आरम्भ कराता हूँ।

माननीय श्री सत्यनारायण सिन्हा (संसदीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री)ः मैं एक सुझाव देना चाहता हूँ। यदि सभा सहमत हो तो हम आज 7 बजे तक या इससे भी अधिक समय तक बैठ सकते हैं। यदि सदस्यगण इससे सतुष्ट नहीं है और अन्य सदस्य भी बोलने के इच्छुक हैं तो हम शनिवार को भी बैठने को तैयार हैं। सरकार इस कार्य के लिये शनिवार का आधा समय दे देगी। शनिवार को प्रश्नकाल नहीं होगा और भोजनावकाश से पूर्व हमारे पास ढाई घंटे से अधिक समय होगा। यदि इससे काम चल जाता है और सभा इस बात से सहमत हो, तो इससे सब कठिनाइयां दूर हो जायेंगी।

माननीय उपाध्यक्षः मेरे विचार से यह बहुत ही उचित प्रस्ताव है। मैं पहले ही कह चुका हूं कि सभी की बैठक शनिवार को भी होगी। मैं इस पर कायम हूँ। यदि सरकारी कार्य की आकस्मिकता के कारण शनिवार को बैठना आवश्यक हो जाता है तो कोई आफत नहीं आ जायेगी। हम समिति की बैठकों के लिये शनिवार को बैठते ही हैं। मैंने