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निपटाने की कोई आवश्यकता नहीं है। मुझे इस बात की आशंका है कि इस सभा में इस विषय के सम्बन्ध में मतैक्य नहीं है। यदि मतैक्य होता तो हम समय को लेकर इतनी
खींचतान नहीं करते। यह सर्वविदित है कि इस बारे में सदस्यों के भिन्न-भिन्न विचार हैं। केवल एक माननीय सदस्य के सुझाव पर मैं सभा की राय नहीं जानना चाहता।
अब इतना तो स्पष्ट है कि शनिवार सरकारी काम-काज का दिन होगा जब हिंदू संहिता विधेयक को छोड़कर अन्य सरकारी कार्य निपटाया जायेगा। मेरा विचार है कि सोमवार को मैं आधे दिन तक गैर-सरकारी सदस्यों को बोलने की अनुमति दूंगा और मध्याह्न पश्चात् मैं माननीय डॉ. अम्बेडकर को बुलाऊंगा।
श्री महावीर त्यागीः हममें से अनेक सदस्य काफी समय से आपका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। क्या मैं इस बात पर अब आपका विनिर्णय समझूं कि अब हिन्दू संहिता विधेयक पर किसी और हिंदू को बोलने की अनुमति नहीं दी जायेगी?
माननीय उपाध्यक्षः मैंने ऐसा तो नहीं कहा और न ही मैं ऐसा कहूंगा। माननीय सदस्य ने यद्यपि वह काफी जागरूक सदस्य हैं, दुर्भाग्य से मुझे गलत समझा है। मैंने केवल इतना कहा था कि एक भी जैन या सिक्ख सदस्य इस विधेयक पर नहीं बोला, जबकि यह उन पर भी समान रूप से लागू होता है।
श्री एच.जे. खांडेकरः हरिजनों के बारे में क्या स्थिति है?
माननीय उपाध्यक्षः इस विधेयक के प्रवर्तक तो हरिजनों के नेता ही हैं। यह कहना उचित नहीं कि हरिजन हिंदू समुदाय से सम्बन्धित नहीं। मेरे विचार में हरिजन भी उतने ही हिंदू हैं, जितने कोई अन्य हिंदू है। जाति सम्बन्धी जागरूकता को लेकर बात को अधिक बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है।
मैंने केवल इतना कहा था कि अन्य सदस्यों की अपेक्षा जैन और सिक्ख सदस्यों को तरजीह दी जायेगी। किसी अन्य सदस्य को बोलने से रोकने का मेरा कोई इरादा नहीं है।
इस समय जो स्थिति है, मैं समझता हूँ कि सरकार का सुझाव बहुत वाजिब है। इस विधेयक पर चर्चा में काफी दिन लग गये हैं और अब एक दिन और दे दिया गया है। यदि सोमवार को भी, सभा की आम राय यह होगी कि अभी चर्चा और चलनी चाहिए तो मैं सभा के साथ हूँ। जहां तक अध्यक्षपीठ का सम्बन्ध है, वह संतुष्ट है कि इस विषय पर काफी चर्चा हो चुकी है।
श्री महावीर त्यागीः मैं इस प्रवृत्ति के विरुद्ध रोष व्यक्त करता हूँ। मैं समझता हूँ कि अध्यक्षपीठ की कृपा दृष्टि, जाति, वर्ग अथवा सम्प्रदाय के बीच कोई विभेद किये बिना, सब पर समान रूप से होनी चाहिए। बहुसंख्यक अथवा अल्पसंख्यक के बीच कोई