(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 269

254 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

रखा गया था। यदि हम लोग याद करें कि किस तरह और किस रूप में हम इस सभा के लिये निर्वाचित हुए हैं, तो हम महसूस करेंगे कि इस सभा के सदस्य किसी अन्य मुद्दे को लेकर नहीं, बल्कि स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिये और इस देश का संविधान बनाने हेतु निर्वाचित हुए थे। यदि इन तर्कों पर अधिक जोर दिया गया तो मुझे इस बात की आशंका है कि इस सभा द्वारा निपटाये गये अनेक मामले अवैध या नियम विरुद्ध बता दिये जायेंगे। इसलिये मैं नही चाहता कि इस आशय का कोई सुझाव दिया जाये जिससे इस सभा की ऐसे मामलों से निपटने सम्बन्धी सक्षमता, प्राधिकार और यथातथ्यता के बारे में किसी संदेह का आभास हो।

महोदय, आम चुनावों के दौरान भी यह सम्भव नहीं होता कि प्रत्येक मामले पर अलग से विचार किया जा सके। जिन लोगों को लोकप्रिय आम चुनावों का अनुभव है वे महसूस करेंगे कि आम चुनावों के दौरान भी अनेक मामले सामने लाये जाते हैं। अतः किसी एक जटिल मामले पर, जिस तरह के मामले पर हम आज विचार कर रहे हैं, बहुसंख्यकों के समर्थन का कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलता। जब तक संविधान में ही जनमत जैसे किसी तरीके का उल्लेख न किया जाये, जब तक कोई संवैधानिक तरीका न हो जैसे कि श्री गोकुलभाई भट्ट ने सुझाया है, इस प्रकार के मामलों पर जनता का स्पष्ट निर्णय जानना, यदि असम्भव नहीं तो बहुत कठिन अवश्य है। वास्तव में जनमत जानने का कोई तरीका है ही नहीं। फिर भी कुछ लोग कह सकते हैं कि इस देश में सार्वजनिक शिक्षा की स्थिति को देखते हुए या इस बात को ध्यान में रखते हुए कि देश के समाचार-पत्रों (प्रेस) पर किस प्रकार कुछ व्यक्तियों ने एकाधिकार बना रखा है और इस प्रकार के मामलों के सम्बन्ध में मतदाता को अनुभव का कितना अभाव है जनता का निर्णय, यद्यपि वह ऐसा करने में सक्षम है, संतोष -जनक नहीं माना जा सकता। इसलिये मेरा सुझाव यह है कि इस प्रकार के तर्क का इस सभा के निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए और हमें अपने आपको प्रस्ताव की चर्चा तक सीमित रखना चाहिए। मुझे प्रसन्नता है कि कुछ माननीय सदस्यों का यही विचार है।

कुछ ऐसे लोगों ने विधेयक के विरोध का नेतृत्व किया है, जिनका मैं निजी रूप से बहुत सम्मान करता हूँ। इसलिए मैं यह मानने को तैयार नहीं हूँ कि इस विरोध का कारण निहित स्वार्थ है या यह विरोध किसी प्रच्छन्न प्रेरणा से प्रेरित है या किन्हीं अन्य कारणों से किया गया है। मैंने पूरी तरह समझा है कि विरोध करने वाले सदस्यों ने अपने विचारों के पक्ष में काफी ठोस कारण दिये हैं, मैं भले ही उनके विचारों से सहमत नहीं हूँ। मेरा मत उनसे भिन्न होते हुए भी मैं यह नहीं कह सकता कि उनके मत पर गम्भीरता से विचार न किया जाये या उनका मत विचार करने योग्य नहीं हैं। इसलिये मैं समझता हूँ कि जिन माननीय सदस्यों ने इस विषय की तात्कालिकता पर प्रश्नचिह्न लगाया है, उनमें से कुछ ने अपने विचार के समर्थन में जोरदार तर्क दिये हैं और काफी लम्बी चर्चा की है। परन्तु