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संदेह नहीं कि हिंदू विधान में या हिंदू संस्कृति में पत्नी को अपने पति की इच्छानुसार चलने की सलाह दी जाती रही है। वह त्याग की मूर्ति रही है। यही उसकी महानता और श्रेष्ठता रही है। यदि अब हमारा स्त्री वर्ग महसूस करता है कि वह लम्बे समय से पराधीन रहा है, उनको कष्ट सहने पड़े हैं और अब वे कष्ट सहने को तैयार नहीं हैं, तो मैं अपने मित्रों को सलाह दूंगा कि वे अधीनता की स्थिति स्वीकार कर लें। परन्तु मैं महसूस करता हूँ कि हर मामले में समानता पर जोर देने से और गृहस्थी से इस तरह के रवैये से परिवार में प्रसन्नता और शान्ति का वातावरण नहीं रहेगा।
इसके बाद मुझे यह शिकायत है कि इस विधेयक में केवल दो प्रकार से किये गये विवाहों को मान्यता दी गयी है। एक सांस्कारिक रीति अनुसार किया गया विवाह और दूसरा सिविल विवाह। मैं सभा को बताना चाहता हूँ यद्यपि मैं यह मान कर चलता हूँ कि अधिकांश इस बात को पहले से जानते होंगे, सिख एक अन्य विधि से विवाह करते हैं जिसका वे गत 100 वर्षों से पालन करते आ रहे हैं। उसे आनन्द विवाह कहते हैं। यह सरल है। दम्पत्ति को गुरु ग्रन्थ साहिब के पास लाया जाता है, वे एक शपथ लेते हैं, ग्रन्थ साहिब के चार फेरे लेते हैं, अरदास करते हैं और विवाह की कार्यवाही पूरी हो जाती है। अब, यह सिविल विवाह नहीं है क्योंकि इसका कहीं पंजीकरण नहीं होता। इसे सांस्कारिक रीति अनुसार विवाह भी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इसमें सपिंड सम्बन्ध या सम्बन्ध निषेध की पाबन्दी आदि का सख्ती से पालन नहीं किया जाता। इसलिये मुझे आशंका है कि इसप्रकार किया गया विवाह, जिसका पालन हम वर्षों से कर रहे हैं, इस विधेयक के अनुसार मान्य नहीं रहेगा। इस शताब्दी के आरम्भ में कुछ संदेह पैदा हुए थे। तब वर्ष 1909 में आनन्द विवाह मान्यता कानून पारित करना पड़ा था। तब यह स्वीकृत हो गया कि इस प्रकार से किये गये सभी विवाह वैध माने जायेंगे। परन्तु जब मैंने इस विधेयक को पढ़ा तो मुझे संदेह हुआ कि क्या इस हिंदू संहिता के अधीन इस प्रकार के विवाह को मान्यता दी जायेगी? इसलिये मैं समझता हूँ कि इस संबंध में सिखों को बहुत चिन्ता है और भारी आशंका भी है। मैं यह बात प्रस्तावक के ध्यान में लाना चाहता हूँ कि यदि सिखों पर इस बात को छोड़ा जाये तो वे इस प्रकार के विवाह को खत्म नहीं करना चाहेंगे और प्रस्तावक को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।
श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगालः मुस्लिम)ः इस विधेयक के अनुसार इस प्रकार का विवाह अवैध माना जायेगा।
सरदार हुक्म सिंहः मैं भी यही समझता हूँ कि इस विधेयक के अनुसार वह अवैध ही माना जायेगा और इसीलिये मैंने सभा का, और विशेष रूप से प्रस्तावक का ध्यान इस ओर दिलाया है।
तलाक के बारे में भी मुझे एक बात कहनी है। यह बताया गया है कि काफी बड़ी जनसंख्या में तलाक की व्यवस्था पहले से है। यह संभव है। मेरा अनुरोध है कि यदि