हिंदू विवाह वैधता विधेयक - Page 28

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वे कह सकते हैं कि उन्होंने विधेयक को पूर्णतया समझा है। परन्तु जो अधिवक्ता यहां उपस्थित हैं, वे विश्वास के साथ यह नहीं कह सकते कि उन्होंने इस विधेयक के उन सभी उपबंधों को समझ लिया है, जो प्रवर समिति द्वारा तैयार किये गये हैं। मुझे इस सदन में यह कहने की अनुमति नहीं है। किंतु यदि मुझे अनुमति दी जाये, तो मैं श्री तजामुल हुसेन से दो या तीन प्रश्न करना चाहूँगा और वे मुझे उत्तर दें कि क्या वे समझते हैं या नहीं समझते? यह मेरा बिल्कुल भी इरादा नहीं है कि मैं सदन की अवमानना करूं। अति विनम्र भाव से मैं यह निवेदन करता हूँ कि ऐसा तनिक भी मेरा इरादा नहीं है।

माननीय उपाध्यक्षः प्रत्येक नागरिक से कानून जानने की अपेक्षा की जाती है। इसी प्रकार प्रत्येक माननीय सदस्य से विधेयक का अध्ययन करने की आशा की जाती है। अतः माननीय सदस्य अपना भाषण जारी रख सकते हैं।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः महोदय, मैं निवदेन कर रहा था इस भूमिका के बाद, मैं निवेदन कर रहा था कि मैं श्री नजीरुद्दीन अहमद के संशोधन के पक्ष में क्यों हूँ। श्रीमान, मैंने आपके विचारार्थ कुछ तथ्य प्रस्तुत किये थे कि यह सदन वैसा प्रतिनिधित्व नहीं करता, जैसा कि यह आने वाले दिनों में कर पायेगा और इसमें अधिक समय नहीं लगेगा। कुछ ही महीनों में नया सदन अस्तित्व में आ जायेगा और इसलिए यह उचित होगा कि (जब तक नया सदस्य अस्तित्व में न आ जाये) इस विधेयक पर विचार करना स्थगित रखा जाए।

श्रीमान, मेरे निवेदन के पक्ष में एक सशक्त दलील यह है कि आप इस तथ्य से भली-भांति अवगत हैं कि आज संपत्ति में दो अलग प्रकार की चीजें सम्मलित हैं। एक भू-सम्पत्ति है, तो दूसरी गृह-सम्पत्ति है। जहां तक भू-सम्पत्ति का सम्बंध है यह विधेयक उसे प्रभावित नहीं करता। इसका भारत जैसे देश में उत्तराधिकार पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा जो मुख्यतया कृषि प्रधान देश है और जहां 90 % लोग गांवों में रहते हैं। किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसकी भू-सम्पत्ति एक कानून द्वारा अधिशासित होगी और गांव में इसकी गृह सम्पत्ति किसी दूसरे कानून द्वारा अधिशासित होगी। मेरे साथ क्या होगा? यदि मेरे पास दिल्ली में कुछ सम्पत्ति है तो वह एक कानून द्वारा अधिशासित होगी और बहादुरगढ़ में मेरी भू-सम्पत्ति दूसरे कानून द्वारा अधिशासित होगी। बहादुरगढ़ के मेरे खेतों में बना घर एक कानून द्वारा अधिशासित होगा और दिल्ली में बना घर दूसरे कानून द्वारा अधिशासित होगा। क्या यह एकरूपता है? यदि ऐसी स्थिति बनाई रखी जाती है तो इसका परिणाम क्या होगा? बहादुरगढ़ में जिस उत्तराधिकारी को नियुक्त किया जायेगा उसे हिंदू संहिता मान्यता नहीं देगी। तब वह लड़का जिसे उत्तराधिकारी नियुक्त किया जायेगा, बहादुरगढ़ में भू-सम्पत्ति का निःसंदेह उत्तराधिकारी होगा, परन्तु मृतक के आवासीय गृह के उत्तराधिकार का दावा कोई अन्य व्यक्ति करेगा। लड़के को भू-सम्पत्ति का अधिकार तो होगा, परन्तु उसका घर पर कोई दावा नहीं होगा तब ऐसी स्थिति में वह लड़का कहां जायेगा? इस विधेयक का प्रभाव यह होगा कि वह भू-सम्पत्ति पर लागू नहीं होगा।