हिंदू विवाह वैधता विधेयक - Page 29

14 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मैं सोचता हूँ कि डॉ. अम्बेडकर की इच्छा ऐसे विधेयक के पारित कराने की है, जहां आर्थिक जोतें बनाई जा सकें, पर आम आदमी की भू-सम्पत्ति का विभाजन न हो। परन्तु जब यह अधिनियम लागू हो जायेगा और जब जमींदारी का उन्मूलन प्रभावी हो जायेगा, तब क्या स्थिति होगी, मुझे इसका ज्ञान नहीं है।

श्रीमती रेणका रेः तो आप ही तत्काल ऐसा विधेयक प्रस्तुत कर सकते हैं।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः अति विनम्र होकर मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि इस दुनिया में इरादे आसानी से पूरे नहीं होते। जैसाकि मेरी माननीय बहन सोचती है, क्या विधेयक के प्रस्तुत करने से इरादे की पूर्ति हो जायेगी। यह विधेयक देश के लाभ के लिए है, परन्तु इस विधेयक को ही कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह विधेयक, जिससे प्रत्येक के अधिकारों का अनधिकृत उपयोग होगा कितना समय लेगा और यह कहां पारित होगा? यह अभी प्रान्तीय सरकार की शक्ति के अधीन है। मैं चाहता हूँ कि हम अपने संविधान में ऐसे परिवर्तन कराएं जिनसे जहां तक भूमि के प्रश्न का संबध है, संविधान के तहत केन्द्रीय सरकार की शक्तियों के अन्तर्गत किया जा सकता है। यदि यह विधेयक इसी रूप में पारित हो जाता है, तो मुझे यह दोष दिखाई देता है कि विधेयक आवासीय सम्पत्ति को तो प्रभावित करेगा पर यह भू-सम्पत्ति को शामिल नहीं करेगा। इसी में भारी उलझन है। अभी मूल-विधेयक में एक परिवर्तन भी किया गया है। वह यह कि विधेयक केन्द्र प्रशासित क्षेत्रों में भूमि पर भी लागू किया जायेगा, अर्थात् यह विधेयक अजमेर, मेरवाड़ और दिल्ली में, आवासीय और भू-सम्पत्तियों दोनों पर लागू होगा पर अन्य प्रान्तों में यह विधेयक भू-सम्पत्ति पर लागू नहीं होगा। दिल्ली और अजमेर-मेरवाड़ में यह विधेयक ग्रामीण और नगर दोनों सम्पत्तियों पर लागू होगा। यह इस विधेयक का सबसे बड़ा दोष है और यही इसके जड़ को उखाड़ सकता है।

अभी लोग इस बात से भी अवगत नहीं हैं कि यह विधेयक किन लोगों पर प्रभावी होगा। इसी कारण मैंने यह निवेदन किया था कि इस विधेयक के लिए पूरा प्रचार नहीं किया गया है। मैं जानता हूँ कि यदि आज लोग यह जान लें कि यह विधेयक दूरगामी प्रभावी है और सैद्धान्तिक परिवर्तन किए जा रहे हैं। उनके उत्तराधिकार के कानून में परिवर्तन जिनका प्रभाव प्रत्येक पर और भारत के प्रत्येक परिवार पर होगा, तो एक बार समस्त भारत के लोग दिल्ली आकर अपने आवेदन-पत्र प्रस्तुत करेंगे कि यह कानून पारित न हो। अनेक लोग इस बात से अवगत नहीं हैं। इस सदन के सदस्यों, बार एसोशिएसन और कुछ अन्य व्यक्ति जो समाचार पढ़ते हैं, को ही इसके बारे में जानकारी दी गई है। आप भली-भांति जानते हैं कि ऐसे लोगों की संख्या कितनी कम है। ऐसा विधेयक जो समस्त हिंदू समाज को प्रभावित करेगा, को पर्याप्त ढंग से प्रचारित नहीं किया गया है और इस बारे में अभिमतों का संग्रह भी नहीं किया गया है। पहले एक समिति का गठन किया गया था। उस समिति ने जगह-जगह पर साक्ष्य इकट्ठे किये और उस समिति की