(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 280

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और जहां तक कानून के इस भाग का सम्बन्ध है, वह यदि पारित कर हमारे लोगों पर थोपा गया, तो वह केवल कागज पर ही रहेगा।

एक और महत्वपूर्ण बात उत्तराधिकार की भी है। मैं अपने मित्रों से सहमत हूं कि हमारी महिलाओं, बहनों, पुत्रियों को सम्पत्ति का हिस्सा मिलना चाहिए। परन्तु इस बारे में मुझे यह कहना है कि मैं इस विषय में अपने विद्वान भाई वख्शी टेक चन्द के इस विचार से सहमत हूँ, जिसमें उन्होंने कुछ समय पहले कहा था कि विवाह के पश्चात् उनको अपने ससुर की सम्पत्ति से हिस्सा मिलना चाहिए न कि पिता की सम्पत्ति से। इसके विशिष्ट कारण हैं। जैसा कि मैंने बताया है, मेरे प्रान्त की परिस्थितियां कुछ विचित्र हैं। पंजाब प्रान्त में छोटे-छोटे किसान रहते हैं। सामान्य तौर पर उनके पास तीन या चार एकड़ की जोत होती है। ऐसे व्यक्ति के पास दो बैल से अधिक नहीं हो सकते जो उसने कहीं से ऋण लेकर प्राप्त किये होते हैं। इसके अतिरिक्त उसके पास एक हल और एक पंजाली तथा एक गधा होता है जो खेत में खाद ले जाने और खेत से घर तक चारा लाने के काम आता है। यह संहिता कृषि पर लागू नहीं होगी परन्तु चल सम्पत्ति का क्या होगा, उसके बैलों का क्या होगा? उदाहरण के लिए एक परिवार, जिसमें एक पुत्र है और एक पुत्री है, के बारे में विचार कीजिए। पिता की मृत्यु हो जाती है, इस चल सम्पत्ति का इन दो में विभाजन होगा। ( एक माननीय सदस्यः क्यों नहीं?) मैंने यह नहीं कहा, और मैं कहता हूँ कि विभाजन होना चाहिए। आमतौर पर घर में एक गाय भी होती है और मैं चाहता हूँ कि प्रस्तावक हम को बताये कि गाय, हल और पंजाली का विभाजन कैसे होगा। दामाद, जो दूर रहता है, उदाहरणार्थ 50 मील दूर रहता है, देश के उस भाग में रहना चाहता है। वह अपनी पत्नी के भाई के साथ नहीं रह सकता, क्योंकि चार एकड़ भूमि से उसको कुछ हासिल नहीं होगा। उसका हित कहीं और है और इसलिये वह सम्पत्ति का विभाजन करके चला जाना चाहता है। बहन अपना हिस्सा मांगेगी, निश्चय ही वह एक बैल लेगी, आधा छकड़ा, आधी पंजाली लेगी और दूर चली जायेगी। और फिर कभी वापस नहीं आयेगी। वह इस संहिता के निर्माताओं का धन्यवाद करेगी, और निःसंदेह उसका पुनः स्वागत नहीं किया जायेगा। ( एक माननीय सदस्यः भाई का अपना बहनोई उसका धन्यवाद करेगा।) यह प्रश्न बहुत सरल है परन्तु इस बारे में भी सोचना चाहिए जब पूर्वी पंजाब में एक परिवार में एक-दो से अधिक तीन-चार भाई होते हैं वे सेना में नियुक्त हो जाते हैं, वे साहसी योद्धा होते हैं, वे विश्व के दूरस्थ क्षेत्रों, अरजेंटाइना, ब्राजील और दक्षिणी अमेरिका तक जाते हैं। वे वहां से धन कमा कर लाते हैं, और अधिक जमीन खरीदते हैं। वे संयुक्त परिवार में रहते हैं, उनका खाना भी एक ही रसोई में पकता है।

महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि इस व्यवस्था से कठिनाइयां पैदा होंगी। मैं अपने विद्वान मित्र डॉ. बक्शी टेक चन्द से सहमत हूँ कि जब तक पुत्री का विवाह नहीं होता, उसको अपने पिता की सम्पत्ति में हिस्सा मिलना चाहिए। परन्तु जैसे ही उसका