(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 281

266 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

विवाह हो जाता है, उसको अपने ससुर की सम्पत्ति से बराबर का हिस्सा मिलना चाहिए और साथ ही उसे विभाजन आदि का भी अधिकार मिलना चाहिए। मैं महिला वर्ग को सम्पत्ति का हिस्सा दिये जाने के विरुद्ध नहीं हूँ, मुझे इस सम्बन्ध में गलत नहीं समझा जाना चाहिए।

मुझे आशंका है कि हमारी शिक्षित लड़कियों के पास काफी समय होता है। एक साधारण लड़की शिक्षा प्राप्त कर लेने के बाद घर के काम-काज में रुचि नहीं लेती, इसलिये घर में व्यस्त रखने के लिये उसके पास काफी काम नहीं होता।

(इस समय उपाध्यक्ष महोदय श्री एम. अनंतसयनम आयंगर पीठासीन हुए)

सरकार को इस खाली समय के लिये उनको कुछ रोजगार दिलाने की व्यवस्था करनी चाहिए। उनको कुछ उपयोगी रचनात्मक काम दिया जाना चाहिए। इस प्रकार के कानून बनाने से और तलाक दिये जाने से बुराइयां समाप्त नहीं होंगी। संयुक्त परिवार व्यवस्था समाप्त करने से पूर्व सरकार को वृद्धावस्था गुजारा भत्ता, बीमारी भत्ता आदि अनेक चीजों की व्यवस्था करनी चाहिए। यदि पवित्र कर्तव्य का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा, तो केवल सम्पत्ति की व्यवस्था से कोई समस्या हल नहीं होगी। जहां तक मैं समझता हूँ, इस विधान के परिणाम स्वरूप परिवार अलग-अलग हो जायेंगे, प्यार और सहानुभूति समाप्त हो जायेगी, न्यायालयों में तलाक और विभाजन के मामलों की संख्या बढ़ जायेगी, बचपन में ही लड़की को मार देने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा और बच्चों की देख-रेख की उपेक्षा होगी।

श्री वी.आई. मुनिस्वामी पिल्लेः उठे।

श्री बी. दास (उड़ीसाः सामान्य)ः महोदय, क्या हम 7 बजे सायं तक बैठेंगे।

माननीय उपाध्यक्षः मुझे 7 बजे सायंकाल तक बैठने में कोई आपत्ति नहीं है, सभा की आम राय क्या है?

कुछ माननीय सदस्यः नहीं, नहीं?

श्री एल. कृष्णास्वामी भारती (मद्रासः सामान्य)ः महोदय, जब तक सभा में कोरम रहेगा, हम बैठने को तैयार हैं।

कुछ माननीय सदस्यः नहीं, नहीं।

माननीय उपाध्यक्षः मैंने भली-भांति सुन लिया है। एक ही आवाज को कई गुना नहीं बढ़ाया जा सकता। माननीय सदस्य और कितना समय लेना चाहते हैं?

श्री वी.आई. मुनिस्वामी पिल्ले (मद्रासः सामान्य)ः लगभग 15 मिनट।