(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 286

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सुविधाएं प्राप्त हों, जो पुरुषों को प्राप्त हैं। यह कहा जाता है कि जो हाथ झूला झुलाता है वही विश्व में विजयी होता है। इसके पूर्व कि वे ये सुविधाएं हम से छीन लें, हमें उनको शान्तिपूर्वक उपलब्ध करा देनी चाहिए। इसलिए मैं इस प्रकार द्वारा लाये गये इस हिंदू संहिता विधेयक का, समर्थन करता हूँ। और अभीष्ट फल प्राप्त हो जाने पर मैं यही कहूंगा कि डॉ. अम्बेडकर, जिन्होंने इसका प्रारूप तैयार करने में कठिन परिश्रम किया है, के लिये यह बड़े गौरव की बात होगी।

ऽश्री ओ.वी. अलगेसन (मद्रासः सामान्य)ः महोदय, कल डॉ. अम्बेडकर ने कहा था कि उनको इस बात की प्रसन्नता है कि इस विधेयक को प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी उन को सौंपी गयी थी। महोदय, निश्चय ही उनका नाम इतिहास में स्वतंत्र भारत के संविधान के पैदा होने में सहायक योग्य दाई के रूप में लिखा जायेगा। महोदय, वह महत्वकांक्षी है। वह गौरव प्राप्त करना चाहते हैं और उनकी सोच युक्ति-युक्त है। वह प्राचीन ऋषियों, मनु, याज्ञवल्क्य और विधि के अन्य प्राचीन निर्माताओं से भी आगे निकलना चाहते हैं।

पूर्व वक्ताओं में से एक, शायद श्री पातस्कर ने, नये संविधान की धारा 44 का हवाला दिया था। यह धारा समूचे देश के लिये एक समान सिविल संहिता से सम्बन्धित है। उन्होंने पूछा था कि इस हिंदू संहिता को वापस लेकर क्यों न एक सिविल संहिता तैयार की जाये? इस से पता चलता है कि किसी शरारत के कारण इसे स्थगित करने का तर्क दिया जा रहा है। परन्तु सरकार इस सम्बन्ध में एक नीतिगत बयान क्यों नही देती? क्या यह विधेयक उस दिशा में पहला कदम है? क्या सरकार, इसके पश्चात् संविधान की धारा 44 को क्रियान्वित करने के लिये और उपाय करेगी? मैं सरकार को परेशान नहीं करना चाहता, परन्तु यदि सरकार इस बारे में अपनी नीति स्पष्ट करने वाला बयान दे, तो मैं उसकी सराहना करूंगा।

महोदय, जब श्री संथानम ने, उस दिन, एक सकल विवाह का तर्क दिया था, उसकी प्रत्येक सदस्य ने दिल से स्वागत किया था। उन्होंने इस संस्था के विरुद्ध आपत्ति उठाने की सब को चुनौती दी थी, संत त्यागराज ने अद्वितीय ढंग से राम के चरित्र को संक्षेप में इस प्रकार व्यक्त कियाः

ओका मतः, ओका वाणम्, ओका पत्नी

अर्थात् एक शब्द, एक तीर, और एक पत्नी।

हमें प्रसन्नता है कि ऐसा आदर्श हमारे सामने रखा गया है। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या यह व्यवस्था केवल हिंदुओं के लिये अच्छी है? क्या सरकार सभी लोगों पर लागू होने वाला यह विधेयक प्रस्तुत करेगी और भारत के सभी नागरिकों पर एकपत्नीक व्यवस्था

ऽसी.ए. (विधि) डी., खंड 6, भाग II, 14 दिसम्बर, 1949, पृष्ठ 614-21