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से वह मकान ही गिर जायेगा, जिसमें हम रहते रहे हैं। इस का प्रयोजन तो नया ढांचा तैयार करने की योजना बनाना है। वह मूलभूत ढांचे फेर-बदल करना चाहते हैं। यह मामला जहां-तहां मरम्मत करने तक सीमित नहीं है। यह मूलभूत ढांचे की मरम्मत है। मैं तो यहां तक कहना चाहता हूँ कि इस का प्रयोजन पुराने ढांचे के स्थान पर नया ढांचा बनाने का है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सारी मरम्मत ढांचे की मरम्मत होती है।
श्री ओ.वी. अलगेसनः ढांचे की मरम्मत किये जाने पर भी मुझे कोई आपत्ति नहीं है। परन्तु ऐसी मरम्मत किये जाने से पूर्व इस सभा के ढांचे में भी मरम्मत करने की आवश्यकता है। मैं यही बात कहना चाहता हूँ। यह कहते हुए मैं इस सभा के प्रतिनिधि स्वरूप और सभा के सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न स्वरूप में जरा-सी भी कमी नहीं कर रहा। महोदय, जब हम अन्य विधान पर चर्चा पूरी कर रहे थे, तब प्रो. शाह इस मुद्दे पर काफी गम्भीरता से बोल रहे थे और किसी को कोई हैरानी भी नहीं हुई थी। यह नैमित्तिक मामला है परन्तु इसका आधार भिन्न है। इसको संदेह और क्रोध की दृष्टि से देखा जाता है। इसलिये मैं कहता हूँ कि हमें अन्तर रखना चाहिए और सभा को ढांचागत मरम्मत कर लेनी चाहिए ताकि वह अधिक विश्वास के साथ यह सुधार कर सके और तब तक कुछ सफलता भी प्राप्त हो जायेगी।
महोदय, एक दूसरी बात वातावरण की है जिसमें इस विधेयक को पारित करवाने का प्रयास किया जा रहा है। महोदय, इस देश में एक महान विभूति है जो हमारे विचार और कार्यवाही दोनों का नेतृत्व करती है। हालांकि हम गुलाम थे, उसने हमें सिखाया कि हमें स्वतंत्र व्यक्ति की तरह सोचना चाहिए और कार्य करना चाहिए और हम ने उस विभूति का अनुसरण किया। इस देश के तनकीकी दृष्टि से स्वतंत्रता होने से बहुत पहले, वह स्वतंत्र विचार और कार्य के वातावरण में हमारे बीच आये थे। परन्तु दुर्भाग्य से आज वह हमारे बीच हमारा मार्गदर्शन करने के लिये नहीं रहे परन्तु उनका अनुसरण करने के लिये उनका उदाहरण हमारे सामने है। अस्पृश्यता उन्मूलन, मन्दिर प्रवेश और इस प्रकार के अन्य सम्बद्ध मामलों के बारे में भी उनकी सलाह यही थी कि हमें कानून बनाकर उन उपयुक्त उद्देश्यों की पूर्ति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने ऐसा उपाय करने की आवश्यकता के बारे में लोगों का मानस तैयार करने का प्रचार किया था। उन्होंने ऐसे उद्देश्यों की पूर्ति के लिये अपने आप को कष्ट दिया। यही वह है कि उन्होंने इसी प्रकार सुधार किये थे और आज यह सुस्थापित तथ्य है। हमें इस प्रकार उनका अनुसरण करना चाहिए, अतः असहमत लोगों पर सुधारों को जबरदस्ती थोपना उचित नहीं है।
श्री वी.आई. मुनिस्वामी पिल्लेः उनको शिक्षित करना आप का काम है।
श्री ओ.वी. अलगेसनः हमें देश का भ्रमण करना चाहिए और जनता को इस बारे में शिक्षित करना चाहिए। आम चुनाव बहुत जल्दी आ रहे हैं, अतः जनता को शिक्षित करने का सर्वोत्तम समय भी मिलेगा।