274 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्रीमती श्री दुर्गाबाई (मद्रासः सामान्य)ः पूरी आशंका तो यही है।
श्री ओ.वी. अलगेशनः इस विधेयक में उल्लिखित विभिन्न उपबंधों के बारे में जनता को जानकारी देने का यह बहुत अच्छा अवसर होगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने कल जो कुछ कहा, वह काफी हद तक ठीक बात है। ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार किस प्रकार काम करती है? उन्होंने एक महत्वपूर्ण विधेयक, जिस पर उन्होंने मतदाताओं की अनुमति प्राप्त कर ली थी, को स्थगित कर दिया। उन्होंने मतदाताओं की अनुमति प्राप्त कर ली थी, फिर भी देश की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने आम चुनावों तक के लिये उसको स्थगित कर दिया। वे नये सिरे से जनता का निर्णय आ जाने के बाद उस विधेयक को कार्यान्वित करेंगे। जब मतदाताओं को अनुमति प्राप्त कर लेने के बाद भी वहां यह स्थिति है, तो मेरे विचार में हमारे इस मामले में भी ऐसा करना आवश्यक है, क्योंकि हमने तो अपने आशय के बारे में मतदाताओं को, कुछ भी जानकारी नहीं दी है। महोदय, हमने देखा है कि प्रत्येक सत्र में दो दिनों के लिये इस विषय पर बहस चलती रही है। यह तो अगली दीपावली पर सोने की चूडि़याँ देने का वचन दोहराये जाने की तरह है। हम इस प्रकार चलते रहे हैं और सम्भवतः यही मार्ग ठीक है। क्योंकि कौन जाने, हमारी बहनें भी, जिन्होंने इस विधेयक को अपना भरपूर समर्थन दिया है, कल को अपना मन बदल लें और इसमें अपने हिसाब से सुधार करने का प्रयास करें। आखिरकार कोई भी व्यक्ति स्थिर नहीं रहता और विशेषकर महिलाएं।
श्रीमती जी. दुर्गाबाईः ऐसे पुरुष भी होते हैं, जो अपनी राय बदल लेते हैं।
श्री ओ.वी. अलगेशनः यह बात महाकवि वाल्मीकि ने कही थी, जिनको हमारे देश में आदिकवि भी कहा जाता है। यह संदर्भ महिलाओं की आम विशेषताओं तक सीमित है। किसी व्यक्ति विशेष पर यह बात लागू नहीं होती। वाल्मीकि ने कहा थाµ
साथावद्धनम लोलाथरम।
अर्थात् ‘स्त्रियाँ बिजली की तरह चंचल होती हैं।’
यह है, उन्होंने जो कहा।
इस प्रकार वे अपना मन बदल सकती है और इसमें सुधार करने का प्रयास कर करती है। मैं आपसे और सभा से पूछना चाहूंगा कि क्या अब तक प्रतीक्षा करने से उनको लाभ हुआ है या नहीं। राउ समिति की सिफारिशों से उनको लाभ हुआ है, पहले पुत्री आधे हिस्से की हकदार थी और अब डॉ. अम्बेडकर के विधेयक के अनुसार पुत्री को पुत्र के बराबर हिस्सा मिलेगा।
पुनः महोदय, यदि वे और प्रतीक्षा करें तो शायद उनको कुछ और अधिक मिल जाना सम्भव है। पुत्री को दुगुना हिस्सा मिल सकता है। हमने पहले दिन श्री ए.के. मेनन के विचार सुने थे और दूसरे दिन एक अन्य स्थान पर श्री थानू पिल्लै के विचार सुने थे। वे