(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 290

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इस बारे में बहुत चिंतित हैं और वे महसूस करते हैं कि बजाय उनका समर्थन करने के, उनका विरोध किया जा रहा है। जब शेष भारत आगे बढ़ रहा है, मालावार के लोग महसूस करते हैं कि इस विधेयक के संदर्भ में उनके साथ न्याय नहीं किया जा रहा। महोदय, वे अन्य लोगों को अपने साथ सहमत कर सकते हैं और पूरा देश मारूमाक्काट्टयम व्यवस्था को स्वीकार कर सकता है, यद्यपि मातृप्रधान व्यवस्था अन्य स्थानों पर समाप्त होती जा रही है। सम्भव है कि मालावार के मेरे मित्र इन सभा के अन्य माननीय सदस्यों को, अपने साथ सहमत कर सकें और फिर मारूमाक्कटट्यम व्यवस्था अपना ली जाये ओर उससे स्थिति बेहतर हो जाये। प्रतीक्षा करने से उनको कोई हानि नहीं पहुंचेगी, क्योंकि उनमें राजी कर लेने की क्षमता विद्यमान है, वे दूसरे को मना सकती हैं, वे फुसला सकती हैं, वे यह सब कुछ कर सकती हैं।

माननीय उपाध्यक्षः माननीय सदस्य को ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

श्री ओ.वी. अलगेशनः मुझे खेद है और मैं इन शब्दों को वापस लेता हूँ।

हमने इस सभा में एक भाषण का विचित्र तमाशा भी देखा है, जो बहुत बढि़या व्यंग्य के साथ आरम्भ हुआ और बड़े गम्भीर उपदेश के साथ समाप्त मन से अपनी भारतीय परंपराओं पर विचार करने का अवसर ही नहीं मिला। पश्चिमी विचारधारा और पश्चिम धाराणाएं सदा हमारे दिमाग में छायी रही हैं। यद्यपि हमारी राजनीतिक गुलामी समाप्त हो गयी है तथापि पश्चिमी सभ्यता और विचारों का जादू अभी भी छाया हुआ है। अतः यदि कुछ समय और बीत जाए, तो बेहतर होगा, ताकि हम नये सिरे से, निष्पक्ष रूप से अपनी संस्थाओं के अच्छे और बुरे पहलुओं पर विचार कर सकें और इससे इस विधेयक में संशोधन करने और आगे सुधार करने का भी अवसर मिलेगा।

महोदय, इस विधेयक की पृष्ठभूमि में पुरुष द्वारा महिला के प्रति किये गये अन्याय की भावना भी निहित है। मैं उन सब बातों को दोहराना नहीं चाहता जो परिहास में या गम्भीरतार्पूवक कही जा चुकी हैं। परन्तु महोदय, मैं इस बात का दावा कर सकता हूँ कि केवल मानसिक उद्विग्नता और आवेश की हालत में, जब व्यक्ति अपने आपे में नहीं होता, सामान्य जीवन बिताने के स्थान पर कोई और हरकत कर बैठता है। मैं इसे, ऐसा कहूंगा हमारे देश में महिला को हानि पहुँचाने के लिये पुरुष कोई कार्यवाही नहीं करता। मैं दूसरे पक्ष द्वारा प्रस्तुत तर्कों पर भी विचार करना चाहता हूँ। सरकारी पक्ष में एक मनोवृत्ति बढ़ रही है कि जब किसी विधेयक पर चर्चा होती है, वे कहते हैं कि कुछ सदस्यों ने इसका विरोध किया है और कुछ अन्य ने समर्थन किया है और इस प्रकार विधेयक पर काफी हद तक सहमति हो गयी है। निपटान का यह बहुत अच्छा तरीका है। मेरे विचार में हमारे विद्व ान मंत्री इस विधेयक के सम्बन्ध में ऐसा नहीं करेंगे, मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है। मैं तो यह कहूंगा कि इस विषय पर कम लोगों की सहमति है, अधिक की नहीं।