(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 291

276 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

महोदय, यह भी कहा गया है कि इस विधेयक का विरोध तर्क पर आधारित नहीं, बल्कि पक्षपात और भावना पर आधारित है। इस बारे में मैं कहना चाहूँगा कि इस विधेयक का समर्थन भी अंधाधुंध और उसी प्रकार पक्षपातपूर्ण तरीके से किया गया है, वह भी तर्क पर आधारित नहीं हैं। ऐसा नहीं है कि विरोध करने वाले अनजान लोग हैं और समर्थन करने वाले बहुत प्रबुद्ध हैं।

महोदय, इस विधेयक के समर्थन में यह कहा गया है कि यह व्यवस्था समर्थकारी और अनुज्ञापक है। एक अन्य स्थान पर कहा गया है कि रूढि़वादी लोग बिना किसी हस्तक्षेप के पुराने तरीके पर चल सकते हैं और सुधारक भी अपने तरीके से चल सकते हैं अथवा जो लोग विधेयक के उपबंधों का लाभ उठाना चाहते हैं, वे अपना मार्ग चुन सकते हैं और अन्य लोग अपना मार्ग चुन सकते हैं। शायद, डॉ. अम्बेडकर ने यह बात कही थी। महादेय, यह लाइसेंस की सामान्य विधि के बारे में कानून पारित करने की तरह है और यह कहना कि जो इसका लाभ उठाना चाहते हैं, उठा सकते हैं, मेरे विचार में समर्थकारी और अनुज्ञापक उपाय वाला तर्क यहां नहीं चल सकता। फिर यह कहा गया कि शारदा अधिनियम जैसे इसी प्रकार के विधेयकों का भी पहले विरोध किया जाता रहा है। इस विधेयक का आधार बिल्कुल भिन्न है। उस अधिनियम और इस विधेयक में बहुत अन्तर है।

डॉ. टेक चन्द ने कहा था कि यह विधेयक काफी समय से देश में विचाराधीन है और हमें इस सम्बन्ध में और प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। यह बात ठीक है कि यह विधेयक कई वर्षों से देश के विचाराधीन है। परन्तु उस समय कांग्रेस सत्ता में नहीं थी और किसी ने भी इसको गंभीरता से नहीं लिया था। जैसे ही कांग्रेस ने सत्ता की डोर संभाली और डॉ. अम्बेडकर ने कांग्रेस पार्टी के मंत्री के रूप में इस विधेयक को प्रस्तुत किया, तब प्रत्येक व्यक्ति ने इस को गंभीरतापूर्वक लिया क्योंकि तब उन्हें पता चल गया कि अब यह लागू हो जायेगा। मैं इसी लिये कहता हूँ कि लोगों को इस विधेयक पर विचार करने का अवसर दिया जाना चाहिए। इस विधेयक की अब तक जो स्थिति थी और जो अब है, उस में अन्तर है।

महोदय, यह भी कहा जाता है कि अनेक महिलाएं, जो इस विधेयक का विरोध करती हैं, वे अपने पुरुषों के प्रभाव में आकर ऐसा करती हैं। मेरे विचार में यह आरोप निराधार है। क्या मैं पूछ सकता हूँ कि जो महिलाएं इस विधेयक का समर्थन करती हैं, वे अपने पतियों से नाखुश हैं? या, वे पुरुष जो इस विधेयक का समर्थन करते हैं, वे अपनी महिलाओं के प्रभाव में आकर ऐसा करते हैं। ऐसे निरर्थक तर्क देने का कोई लाभ नहीं है।

श्री बी. दासः इन प्रश्नों का उत्तर देने के लिये यहां कोई उपस्थित नहीं है।

श्रीमती जी. दुर्गाबाईः क्या आप यह कहते हो कि वे अपने पतियों से, जो बार-बार विवाह करते हैं, प्रसन्न रहती हैं?